अयोध्या के राम मंदिर में दान के कथित गबन की जांच कर रही विशेष जांच टीम यानी एसआईटी सोमवार को सीधे उच्चतम न्यायालय को अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंप सकती है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, एसआईटी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को प्राप्त दान से संबंधित कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच को पूरी तरह अंतिम रूप देने के लिए राज्य सरकार से अतिरिक्त समय भी मांग सकती है।
यह घटनाक्रम उन याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय द्वारा सुनवाई किए जाने के कुछ दिनों बाद सामने आया है, जिनमें दान गबन की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच का अनुरोध किया गया था। शीर्ष अदालत ने एसआईटी को इस मामले में जांच की स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। गौरतलब है कि लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन की सदस्यता वाली इस तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन 13 जून को ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने किया था।
इससे पहले 23 जून को एसआईटी द्वारा राज्य सरकार को सौंपी गई नौ पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद कई बड़े घटनाक्रम हुए थे। उस रिपोर्ट के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई, आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और मंदिर के दान से कथित तौर पर निकाली गई नकदी बरामद की गई। इसी प्रकरण के बाद ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा को अपने पदों से इस्तीफा देना पड़ा था।
एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में दान प्रबंधन प्रणाली की गंभीर खामियों को उजागर किया गया था। सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण में पाया गया कि 27 अप्रैल से 5 जून के बीच गिनती की प्रक्रिया के दौरान कर्मचारियों ने नोटों की गड्डियों और सिक्कों को अपने कपड़ों, जेबों और जूतों में छिपाने की लगभग 70 घटनाओं को अंजाम दिया। रिपोर्ट के अनुसार, पुराने सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध न होने के कारण गबन के पूरे दायरे का सटीक आकलन करना फिलहाल असंभव है, लेकिन कर्मचारियों के बैंक खातों में जमा राशि से संकेत मिलता है कि ऐसी चोरियां पहले भी हो रही थीं।
एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में मंदिर के प्रशासन और दान की गणना प्रणाली में व्यापक सुधारों की सिफारिश किए जाने की उम्मीद है। रिपोर्ट में उन सुरक्षा उपायों की कमी की ओर भी इशारा किया गया है, जैसे कर्मचारियों की तलाशी न लेना और गिनती कक्ष में निजी सामान ले जाने पर रोक न होना। ट्रस्ट इन निष्कर्षों और सुधारात्मक उपायों पर चर्चा करने के लिए 22 जुलाई को अयोध्या में एक महत्वपूर्ण बैठक करने वाला है।
वर्तमान में उच्चतम न्यायालय उन याचिकाओं पर भी सुनवाई कर रहा है जिनमें अदालत की निगरानी में सीबीआई जांच, फॉरेंसिक ऑडिट और ट्रस्ट के वित्तीय मामलों का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से ऑडिट कराने की मांग की गई है। इस बीच, विश्व हिंदू परिषद के नेताओं और चंपत राय के करीबियों ने फिलहाल इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि वे सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट जमा होने के बाद ही अपनी प्रतिक्रिया देंगे।
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