… अजय मसंद …
नागोया, 26 सितंबर एशियाई खेलों की कबड्डी प्रतियोगिता में भारत का दबदबा बरकरार रहा जहां पुरुष और महिला दोनों टीमों ने शनिवार को खिताबी मुकाबलों में चिर-परिचित प्रतिद्वंद्वी ईरान को हराकर अपने स्वर्ण पदक का बचाव किया। पुरुष टीम ने 40-34 से जबकि महिला टीम ने रोमांचक मुकाबले में 37-34 से जीत दर्ज की। पुरुष टीम का यह एशियाई खेलों में नौवां और महिला टीम का चौथा स्वर्ण पदक है।
पुरुष टीम की जीत की खास बात यह रही कि उसके सबसे अनुभवी खिलाड़ी पवन सहरावत को मैट पर उतरने की जरूरत ही नहीं पड़ी। मुकाबले के बीच में जब गत चैंपियन टीम नियंत्रण के लिए संघर्ष कर रही थी, तब रेडर अर्जुन देशवाल और देवांक ने निर्णायक क्षणों में संयम दिखाते हुए मुकाबले का रुख भारत के पक्ष में मोड़ दिया। ईरान ने हर अंक के लिए पूरी ताकत झोंकी और शारीरिक खेल में भारत को कड़ी चुनौती दी।
उसने आखिरी के कुछ मिनटों को छोड़कर भारतीय टीम को लय में आने का मौका नहीं दिया। मध्यांतर तक ईरान 18-17 से आगे था और भारत पर दबाव साफ दिखाई दे रहा था। भारतीय खिलाड़ियों ने हालांकि धैर्य नहीं खोया।
उन्होंने खेल की गति बदली, अपने रेडरों पर भरोसा जताया और अनुभव का इस्तेमाल किया। अर्जुन और देवांक बार-बार ईरान के पाले में ज्यादा अंदर तक जाने में सफल रहे और सही मौके चुने और अहम अंक लेकर लौटे। इससे धीरे-धीरे ईरान दबाव में आने लगा।
सहरावत ने मैच के बाद कहा, ‘‘मध्यांतर में ईरान 18-17 से आगे था। हमने रणनीति बनाई कि केवल उन्हीं रेडरों को भेजा जाएगा जो विपक्षी खिलाड़ियों पर दबदबा बना सकें। देशवाल और देवांक ने यह काम बखूबी किया और उनकी रेड ने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया।’’
रणनीति में बदलाव सिर्फ रेडरों तक सीमित नहीं रहा।
शुरुआती दौर में जरूरत से ज्यादा आगे जाकर फंसने वाले असलम मुस्तफा को डिफेंस में भेजा गया, जहां उन्होंने अधिक प्रभावी भूमिका निभाई। भारत ने अपनी रक्षापंक्ति भी मजबूत की, जिससे ईरान के रेडरों के लिए आसान अंक हासिल करना मुश्किल हो गया। मुकाबले का निर्णायक मोड़ तब आया जब भारत ने ऑलआउट कर अपनी बढ़त 29-24 कर ली।
स्वर्ण पदक करीब दिखने लगा तो भारतीयों ने जल्दबाजी के बजाय खेल की गति धीमी कर दी। रेडर मिडलाइन के आसपास रहे, मौके का इंतजार किया और बिना जोखिम उठाए सुरक्षित लौटते रहे। ईरान के पास अंक जुटाने के लिए जोखिम उठाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
उसके रेडर भारतीय पाले में ज्यादा गहराई तक आने लगे, लेकिन मजबूत होती भारतीय रक्षापंक्ति ने उन्हें अंक जुटाने के कम मौके दिये। हर नाकाम रेड के साथ ईरान पर दबाव बढ़ता गया और भारत अपनी बढ़त के सहारे धैर्य से खेलता रहा। महिला टीम ने भी दबाव भरे मुकाबले में संयम बनाए रखते हुए रिकॉर्ड चौथा स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
भारत की महिला कबड्डी टीम ने जकार्ता में 2018 में हुए खेलों के अलावा 2010 में ग्वांग्झू खेलों में महिला कबड्डी के पदार्पण के बाद से हर एशियाई खेल में स्वर्ण पदक जीता है। जकार्ता में उसे फाइनल में ईरान ने हराया था। ईरान इस खेल में भारत का कठिनतम प्रतिद्वंद्वी रहा है लेकिन मुकाबले में अनुभवहीनता उसके लिये नुकसानदेह साबित हुई।
भारत ने ग्रुप चरण में ईरान को हराया था और उसकी कमजोरियों का एक बार फिर फायदा उठाया। ईरान के खिलाड़ियों के पास ऊंचा कद और तकनीक थी लेकिन अनुभव नहीं था। भारत ने हाफ टाइम तक 22-16 से बढत बना ली थी लेकिन दूसरे हाफ में ईरान ने वापसी करके स्कोर अंतर सिर्फ एक अंक का करके स्कोर 26-27 कर दिया।
भारत एक समय 27-22 से आगे था लेकिन ईरान की एटेना मदादी ने चार अंक की रेड करके स्कोर 27-26 कर दिया। भारतीय डिफेंस ने इसके बाद संभलकर ईरान को मौके नहीं दिये। भारत की बढत एक बार फिर तीन अंक की ही रह गई जब पिंकी रेडर को पकड़ने में नाकाम रही लेकिन संजू ने रेड पर दो ईरानी खिलाड़ियों को पकड़कर दो अंक बनाये।
पुष्पा राणा ने ईरान के अगले हमले पर जबर्दस्त टैकल के जरिये भारत को 34-28 से आगे कर दिया जिस समय चार मिनट का खेल बाकी था। ईरान ने आखिर में पूरा जोर लगाकर अंतर 37-34 का किया लेकिन भारत को जीत से नहीं रोक सके। इस जीत के बाद भारतीय टीम ने मैदान का चक्कर लगाते हुए ‘वंदे मातरम’ गीत गाया।
महाराष्ट्र की दिग्गज कबड्डी खिलाड़ी सोनाली शिंगेत ने कहा ,‘‘ ईरान काफी कठिन प्रतिद्वंद्वी है और हमें पता था कि ग्रुप चरण का मुकाबला जीतने के बावजूद हमें कड़ी चुनौती मिलेगी। हमने उनके कमजोर बायें फ्लैंक का फायदा उठाया।
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