आंध्र प्रदेश पुलिस ने NTR जिले में यात्रियों की सुरक्षा के लिए QR Code आधारित नया सिस्टम शुरू किया है। QR कोड स्कैन करते ही वाहन और ड्राइवर की जानकारी मिल जाती है।
ऐसे काम करती है यह तकनीक
हर रजिस्टर्ड ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और कैब में ड्राइवर की सीट के पीछे एक यूनिक QR Code Sticker लगाया जाता है। यात्री सफर शुरू करने से पहले अपने स्मार्टफोन से इस QR कोड को स्कैन करता है। स्कैन करते ही सिस्टम वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर, ड्राइवर की पहचान, लाइसेंस से जुड़ी जानकारी और ट्रिप से संबंधित विवरण दिखने लगता है।
अगर ऐप में दिखाई गई जानकारी और वाहन की असली जानकारी में कोई अंतर होता है, तो यात्री तुरंत सतर्क हो सकता है और इसकी सूचना पुलिस को दे सकता है। इससे फर्जी टैक्सी या गलत पहचान वाले ड्राइवरों की पहचान करना आसान हो सकता है।
Live Tracking सबसे बड़ी ताकत
सिस्टम की सबसे खास बात इसकी रियल-टाइम ट्रैकिंग क्षमता है। QR कोड स्कैन करने के बाद यात्रा के दौरान यात्री की लाइव लोकेशन सुरक्षित तरीके से पुलिस कंट्रोल रूम और आसपास मौजूद पेट्रोलिंग टीमों के साथ शेयर होती रहती है।
अगर सफर के दौरान कोई आपात स्थिति, छेड़छाड़, असुरक्षित ड्राइविंग या संदिग्ध गतिविधि होती है, तो पुलिस वाहन की लोकेशन तुरंत ट्रैक कर सकती है और सबसे नजदीकी पेट्रोलिंग यूनिट को मौके पर भेज सकती है। इससे आपातकालीन स्थिति में रिस्पॉन्स टाइम काफी कम होने की उम्मीद है।
सिर्फ QR Code नहीं, पूरा डिजिटल सेफ्टी नेटवर्क
बता दें, सिस्टम केवल QR कोड तक सीमित नहीं है। इसमें वाहन का वेरिफिकेशन, ड्राइवर ऑथेंटिकेशन, लाइव लोकेशन शेयरिंग और पैसेंजर फीडबैक जैसे कई डिजिटल फीचर्स को एक साथ शामिल किया गया है। यात्रियों की शिकायतों और रेटिंग के आधार पर ड्राइवरों के रिकॉर्ड की निगरानी भी की जा सकती है।
फिलहाल इस परियोजना के पहले चरण में करीब 6,000 ऑटो-रिक्शा, टैक्सी, कैब और रेंटल वाहनों में QR Code Stickers लगाए जा रहे हैं। अगर यह तकनीक सफल रहती है, तो इसे आंध्र प्रदेश के अन्य जिलों और भविष्य में देश के दूसरे राज्यों में भी लागू किया जा सकता है।
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