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आंध्र प्रदेश के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपना शिकंजा कस दिया है. जांच एजेंसी ने मास्टरमाइंड केसिरेड्डी राजशेखर रेड्डी और उनके सिंडिकेट की 441.63 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क कर ली है. राज्य की पुरानी पारदर्शी व्यवस्था को हटाकर मैनुअल सिस्टम लागू करने और डिस्टिलरीज से 15 से 20 प्रतिशत तक रिश्वत वसूलने के इस बड़े खेल में सरकारी खजाने को करीब 4000 करोड़ रुपये का भारी चूना लगाया गया है.
शऱाब घोटाले मामले में ईडी ने 400 करोड़ की संपत्ति जब्त की.
यह पूरी जांच आंध्र प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव की शिकायत पर सीआईडी (CID) द्वारा दर्ज की गई एफआईआर पर आधारित है. एफआईआर में साफ तौर पर आरोप लगाया गया था कि शराब सिंडिकेट की इस सुनियोजित लूट में सरकारी खजाने को लगभग 4,000 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ है. जांच में सामने आया कि रिश्वत का यह काला धन हैदराबाद में कई गुप्त ठिकानों पर फिजिकल कैश के रूप में इकट्ठा किया गया और फिर सिंडिकेट के ‘कैश हैंडलर्स’ द्वारा इसे ठिकाने लगाया गया. ईडी अब तक 1,048.45 करोड़ रुपये के ‘मनी ट्रेल’ (रिश्वत के पैसे का रास्ता) का पर्दाफाश कर चुकी है.
सिस्टम से हटकर ‘लूट का खेल’
घोटाले की शुरुआत सिस्टम में की गई एक बड़ी छेड़छाड़ से हुई. ईडी के अनुसार, 2019 से पहले आंध्र प्रदेश में शराब की खरीद और बिक्री एक बेहद पारदर्शी और ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर के जरिए होती थी, जिसमें हर एक बोतल की डिजिटल ट्रैकिंग होती थी. लेकिन, 2019 के विधानसभा चुनावों के बाद बनी नई सरकार ने इस पारदर्शी सिस्टम को जानबूझकर बंद कर दिया. इसकी जगह एक ‘मैनुअल सिस्टम’ लाया गया और आंध्र प्रदेश स्टेट बेवरेजेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (APSBCL) के जरिए खुदरा शराब की दुकानों पर पूरी तरह एकाधिकार (Monopoly) जमा लिया गया. इसी मैनुअल सिस्टम की आड़ में रिश्वत देने वाले मनपसंद ब्रांड्स को फायदा पहुंचाया गया और पुराने ब्रांड्स को बाजार से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.
गुंडा टैक्स और सीक्रेट चैट्स
सिंडिकेट ने डिस्टिलरीज को ऑर्डर फॉर सप्लाई (OFS) देने के नाम पर खुलेआम ‘गुंडा टैक्स’ वसूला. ईडी के खुलासे के मुताबिक, डिस्टिलरीज को ओएफएस अप्रूवल के लिए हर केस की बेसिक कीमत का 15% से 20% हिस्सा गैर-कानूनी रिश्वत के रूप में देने के लिए मजबूर किया गया. जो मैन्युफैक्चरर्स यह रिश्वत देने से मना करते, उनके सप्लाई ऑर्डर रिजेक्ट कर दिए जाते और उनकी सही पेमेंट रोक दी जाती थी.
काली कमाई से खरीदे अकूत संपत्ति
पुलिस और जांच एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए सिंडिकेट के सदस्य वीओआईपी (VoIP) और सिग्नल (Signal) जैसे एन्क्रिप्टेड कॉलिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते थे. ऐसा इसलिए किया गया ताकि बूनेटी चाणक्य, मुप्पीडी अविनाश और मोहम्मद सैफ जैसे अहम गुर्गों की पहचान छिपी रहे. पीएमएलए जांच में यह साफ हो गया है कि राजशेखर रेड्डी ने अपने साथियों के साथ मिलकर इस सिंडिकेट के जरिए करीब 3,500 करोड़ रुपये की सीधे तौर पर रिश्वत वसूली. इस काली कमाई को रियल एस्टेट और निजी संपत्तियां खरीदने में खपा दिया गया. एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि इस बड़े रैकेट की आगे की जांच अभी जोरों पर है.
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दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व…और पढ़ें
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