राजस्थान समेत देश में 15 से 49 साल की महिलाओं में एनीमिया चुनौती बनता जा रहा है। हालात ये है कि प्रदेश में 54.4 फीसदी महिलाएं एनीमिक है। मौजूदा स्थिति में राजस्थान देश में 13वें नंबर पर है, जो चिंता का विषय है। देश में पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक 71.4 महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। छत्तीसगढ़ में 60.8%, पंजाब में 58.7% और तेलंगाना में 57.6% है। आंध्र प्रदेश में यह आंकड़ा 57.5% है। मध्यप्रदेश में 54.7% ग्रसित हैं। यह खुलासा नेशनल फैमिली हैल्थ सर्वे (एनएफएचएस-5) के जारी आंकड़ों के एनालिसिस के आधार पर हुआ है। वर्ष-2019 से लेकर 2021 तक हुए सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े मिले है। केन्द्र सरकार ने ये आंकड़े राज्य सभा में जारी किए है। ऐसे में पोषण एवं एनीमिया अभियान पर सवालिया निशान लगता है। 1.खराब – पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के राज्यों में स्थिति ज्यादा खराब है। त्रिपुरा में 67.2%, असम और झारखंड में 65.9-65.9% तथा ओडिशा में 64.3% महिलाओं में एनीमिया दर्ज किया गया है। बिहार में भी 63.5% बीमारी से प्रभावित है। 2.चिंताजनक – पश्चिम के राज्यों में भी स्थिति चिंताजनक है। महाराष्ट्र में 54.2% और यूपी में 50.4% महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं, जबकि उत्तराखंड में 42.2% के साथ इन राज्यों में सबसे कम फीसदी दर्ज किया गया है। भास्कर एक्सपर्ट-डॉ.पुनीत सक्सेना, डॉ.प्रवीण मंगलूनिया
महिलाओं में एनीमिया का मुख्य कारण आयरन एवं पोषण की कमी, गर्भावस्था के दौरान देखभाल की कमी और जागरूकता का अभाव है। खून की कमी से कमजोरी, थकान, चक्कर आना, गर्भावस्था में जटिलताएं और प्रसव के समय जोखिम बढ़ जाता है। एनएफएचएस-3 के अनुसार देश में 15 से 49 साल की महिलाएं 67 फीसदी, एनएफएचएस-4 के अनुसार 46.6 फीसदी महिलाओं में खून की कमी मिली थी।
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