देश को नक्सल आतंक की जकड़ से बाहर निकालने और जम्मू-कश्मीर तथा पूर्वोत्तर में आतंकवाद पर निर्णायक प्रहार के बाद अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा के अगले चरण का बिगुल फूंक दिया है। इस बार निशाने पर केवल घुसपैठ नहीं, बल्कि घुसपैठ के जरिये सीमावर्ती इलाकों में बदलता जनसंख्या संतुलन, तस्करी, मादक पदार्थों का जाल, कट्टरपंथ, ड्रोन खतरे, संगठित अपराध और सीमा पार से संचालित छद्म युद्ध की पूरी रणनीति है। अमित शाह ने स्पष्ट संकेत दिया है कि देश को घुसपैठिया मुक्त बनाने और सीमाओं को अभेद्य सुरक्षा कवच देने का व्यापक अभियान अब सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। अमित शाह का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में अस्वाभाविक जनसंख्या परिवर्तन केवल स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक स्थिरता और सामरिक संतुलन से जुड़ा हुआ प्रश्न है, ऐसे में यह अभियान वर्तमान के साथ-साथ भविष्य के भारत की सुरक्षा का भी मजबूत आधार बनेगा।
हम आपको बता दें कि नई दिल्ली में आयोजित सीमांत जिला पुलिस अधीक्षक सम्मेलन को संबोधित करते हुए अमित शाह ने सीमा सुरक्षा के लिए सरकार की नई और व्यापक रणनीति सामने रखी। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन सीमा सुरक्षा के समग्र दृष्टिकोण को संस्थागत स्वरूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अब केवल भूमि सीमाओं तक ही नहीं, बल्कि आने वाले समय में तटीय सीमाओं की सुरक्षा के लिए भी इसी प्रकार का समग्र और एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। सम्मेलन में सीमा सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों, उनके समाधान और भविष्य की नीति तैयार करने पर व्यापक विचार विमर्श किया गया।
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सीमा सुरक्षा व्यवस्था अब केवल चौकियों और गश्त तक सीमित नहीं रहेगी। सरकार सीमा सुरक्षा बलों, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, केंद्र सरकार के संबंधित विभागों और सीमावर्ती क्षेत्रों के स्थानीय नागरिकों को साथ जोड़कर चार स्तरीय सुरक्षा तंत्र तैयार कर रही है। यही चतुष्कोणीय सुरक्षा व्यवस्था भविष्य में भारत की सीमाओं को अभेद्य बनाने का सबसे मजबूत आधार बनेगी। उन्होंने कहा कि सुरक्षित सीमा, समृद्ध सीमावर्ती क्षेत्र और सतर्क समाज मिलकर ही राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।
गृह मंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत की लगभग पंद्रह हजार किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा अठारह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से होकर गुजरती है। इतनी विशाल सीमा की सुरक्षा केवल सुरक्षा बलों के भरोसे संभव नहीं है। इसके लिए स्थानीय समाज की भागीदारी, प्रशासनिक समन्वय और आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग अनिवार्य है। इसी सोच के तहत सरकार अलग थलग सीमा चौकियों की पुरानी व्यवस्था से आगे बढ़कर एकीकृत सुरक्षा तंत्र विकसित कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत की स्मार्ट सीमा की परिकल्पना आने वाले वर्षों में दुनिया की सबसे आधुनिक सीमा सुरक्षा व्यवस्था का रूप लेगी।
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने नक्सलवाद, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और पूर्वोत्तर में हिंसा के खिलाफ उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। अब अगले तीन वर्षों में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर भी निर्णायक प्रहार किया जाएगा। साथ ही ऐसा मजबूत सुरक्षा ढांचा तैयार किया जा रहा है जिससे देश पूरी तरह घुसपैठ मुक्त बने और भविष्य में किसी भी प्रकार की अवैध घुसपैठ की संभावना लगभग समाप्त हो जाए। उन्होंने कहा कि पहले समस्याएं स्थायी होती थीं और समाधान अस्थायी, लेकिन अब सरकार समस्याओं की जड़ पर प्रहार कर स्थायी समाधान तैयार कर रही है।
देखा जाये तो इस पूरी रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सीमावर्ती क्षेत्रों में बदलते जनसंख्या स्वरूप पर मोदी सरकार का विशेष ध्यान है। अमित शाह ने स्पष्ट कहा कि सीमावर्ती इलाकों में अस्वाभाविक जनसंख्या परिवर्तन का सबसे बड़ा कारण अवैध घुसपैठ है। इसी कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनसंख्या अध्ययन अभियान प्रारंभ किया है, जिसके तहत जनसंख्या में हो रहे अस्वाभाविक बदलावों का अध्ययन किया जाएगा, उनके कारणों की पहचान होगी और भविष्य में ऐसे परिवर्तनों को रोकने के उपाय सुझाए जाएंगे। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अस्वाभाविक कारणों से होने वाली जनसंख्या वृद्धि पर कठोरता के साथ नियंत्रण किया जाएगा। गृह मंत्री ने निर्देश दिया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसंख्या परिवर्तन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण सूचना सबसे निचले स्तर से लेकर शीर्ष स्तर तक तत्काल पहुंचनी चाहिए, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
सरकार सीमाओं को मजबूत बनाने के लिए आधारभूत ढांचे पर भी अभूतपूर्व निवेश कर रही है। अमित शाह ने बताया कि सीमा क्षेत्रों में आधारभूत संरचना पर निवेश में चार सौ प्रतिशत की वृद्धि की गई है और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ सड़कों, संचार व्यवस्था, निगरानी तंत्र तथा अन्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। भारत म्यांमार सीमा के सोलह सौ दस किलोमीटर लंबे हिस्से पर 31 हजार करोड़ रुपये की लागत से बाड़ लगाने का कार्य भी तेजी से चल रहा है। इसका उद्देश्य केवल घुसपैठ रोकना नहीं, बल्कि छद्म युद्ध, अवैध हथियारों की आवाजाही, मादक पदार्थों की तस्करी, संगठित अपराध और सीमा पार से संचालित अन्य गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाना है।
साथ ही मोदी सरकार की सीमा सुरक्षा नीति केवल सैन्य दृष्टिकोण तक सीमित नहीं है। सीमावर्ती गांवों को मजबूत बनाना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के अंतिम गांव को पहला गांव बताया है। इस योजना के माध्यम से सीमावर्ती क्षेत्रों से पलायन रोकने, स्थानीय रोजगार बढ़ाने और सरकारी योजनाओं का शत प्रतिशत लाभ प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। मोदी सरकार का मानना है कि जब सीमा पर बसे गांव समृद्ध होंगे, वहां के लोग सुरक्षित और आत्मनिर्भर होंगे, तभी सीमा सुरक्षा भी स्थायी रूप से मजबूत होगी।
सामरिक दृष्टि से देखें तो यह नई नीति भारत की सुरक्षा सोच में बड़ा परिवर्तन है। अब देश केवल किसी घटना के बाद प्रतिक्रिया देने की नीति पर नहीं रहेगा, बल्कि संभावित खतरों को पहले ही पहचानकर उन्हें रोकने की सक्रिय रणनीति अपनाई जाएगी। घुसपैठ, छद्म युद्ध, कट्टरपंथ, मादक पदार्थों की तस्करी, ड्रोन के जरिये हथियार पहुंचाना, साइबर अपराध और संगठित अपराध आज एक दूसरे से जुड़ी चुनौतियां बन चुकी हैं। ऐसे में इन सभी के खिलाफ एकीकृत सुरक्षा तंत्र भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती देगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सीमाओं पर प्रभावी नियंत्रण, जनसंख्या संतुलन की निगरानी, आधुनिक तकनीक आधारित सुरक्षा व्यवस्था और सीमावर्ती गांवों का विकास एक साथ सफलतापूर्वक आगे बढ़ता है तो भारत न केवल अपनी सीमाओं को अधिक सुरक्षित बना सकेगा, बल्कि भविष्य में किसी भी प्रकार की बाहरी चुनौती का अधिक प्रभावी ढंग से सामना करने की स्थिति में भी होगा। अमित शाह द्वारा प्रस्तुत यह नई रणनीति केवल सीमा सुरक्षा का कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक स्थिरता, सामरिक शक्ति और भविष्य के भारत की सुरक्षा संरचना को मजबूत करने वाला व्यापक अभियान बनकर उभर रही है।
हम आपको यह भी बता दें कि इस पूरी रणनीति को जमीन पर उतारने के लिए अमित शाह स्वयं भी सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा कर चुके हैं। हाल ही में उन्होंने सीमा चौकियों का निरीक्षण किया, सुरक्षा बलों के साथ संवाद स्थापित किया, नियंत्रण रेखा का निरीक्षण किया, भारत-पाक सीमा के अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र जाकर सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की और महिला जवानों के लिए नई बैरकों का उद्घाटन किया। स्पष्ट है कि मोदी सरकार केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक निगरानी प्रणाली, तकनीक आधारित सुरक्षा तंत्र, मजबूत समन्वय और प्रत्यक्ष निरीक्षण के माध्यम से पूरे सीमा सुरक्षा ढांचे को नए सिरे से सशक्त बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
-नीरज कुमार दुबे
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