रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में मंत्रियों के एक अनौपचारिक समूह ने पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न स्थिति पर चर्चा करने के लिए दिल्ली में बैठक की। इस बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, केंद्रीय संसदीय मंत्री किरेन रिजिजू, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, परमाणु ऊर्जा राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह सहित अन्य कई अधिकारी मौजूद रहे। केंद्र द्वारा मौजूदा संघर्ष पर कई बैठकें आयोजित करने और लोगों को ईंधन की कोई कमी न होने का आश्वासन देने के बीच यह बैठक हुई है।
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विदेश मंत्रालय घटनाक्रम पर कड़ी नजर रख रहा है और पश्चिम एशिया में मौजूद भारतीय नागरिकों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इससे पहले शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों और उपराज्यपालों के साथ वर्चुअल बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों और देश पर इसके संभावित प्रभाव के मद्देनजर राज्यों की तैयारियों की समीक्षा की गई।
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, प्रधानमंत्री ने सभी मुख्यमंत्रियों द्वारा दिए गए बहुमूल्य सुझावों की सराहना की और कहा कि ये सुझाव मौजूदा स्थिति को प्रभावी ढंग से संभालने में महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने आगे आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए सतर्कता, तैयारी और समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि स्थिति लगातार बदल रही है, जिसके लिए निरंतर निगरानी और अनुकूल रणनीतियों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि 3 मार्च से एक अंतर-मंत्रालयी समूह कार्यरत है, जो प्रतिदिन स्थिति की समीक्षा कर समय पर निर्णय ले रहा है।
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उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सरकार की प्राथमिकताएं आर्थिक और व्यापारिक स्थिरता बनाए रखना, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना, नागरिकों के हितों की रक्षा करना और उद्योग एवं आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना है। राज्यों की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि निर्णयों का प्रभावी कार्यान्वयन राज्य स्तर पर होता है। उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच निरंतर संचार और समन्वय के साथ-साथ समय पर सूचनाओं के आदान-प्रदान और संयुक्त निर्णय लेने का आह्वान किया, ताकि प्रतिक्रियाएं त्वरित और सुव्यवस्थित हों।
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