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इस साल की अमरनाथ यात्रा के लिए अब तक 3.6 लाख से ज्यादा श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। यात्रा मार्ग पर कई जगह अब भी 10 से 12 फीट तक बर्फ जमी है, लेकिन सीमा सड़क संगठन (BRO) दोनों रास्तों पर तेजी से ट्रैक बहाल करने में जुटा है। अधिकारियों का दावा है कि 15 जून तक दोनों रास्ते पूरी तरह तैयार कर दिए जाएंगे।
यात्रा 3 जुलाई से बालटाल-सोनमर्ग और पारंपरिक नुनवान-पहलगाम मार्ग से शुरू होगी। 57 दिन की यह यात्रा 28 अगस्त को रक्षा बंधन और सावन पूर्णिमा के दिन संपन्न होगी। रजिस्ट्रेशन 15 अप्रैल से शुरू हुए थे।
5 से 30 लोगों के ग्रुप के लिए रजिस्ट्रेशन बंद
5 से 30 लोगों के ग्रुप में यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए रजिस्ट्रेशन बुधवार को बंद हो गए। हालांकि, अकेले या छोटे ग्रुप में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए स्लॉट खाली रहने तक रजिस्ट्रेशन जारी रहेंगे।
रजिस्ट्रेशन पंजाब नेशनल बैंक, जम्मू-कश्मीर बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और यस बैंक की तय शाखाओं के जरिए हो रहा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस साल यह संख्या 5 लाख के पार जा सकती है। 2025 में 4.14 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 5.10 लाख से ज्यादा था।
रास्ते में अब भी 12 फीट तक बर्फ जमी
रास्ते में सामान्य जगहों पर 6 से 8 फीट और हिमस्खलन वाले इलाकों में 10 से 12 फीट तक बर्फ जमी है। बालटाल मार्ग पर 9 किमी और नुनवान-पहलगाम मार्ग पर 8 किमी ट्रैक से बर्फ हटाई जा चुकी है। ट्रैक को 12 फीट चौड़ा करने, सतह सुधारने, रिटेनिंग वॉल और कल्वर्ट बनाने का काम भी चल रहा है।
टेंट की जगह प्री-फैब्रिकेटेड स्ट्रक्चर में ठहरने की सुविधा
इस बार बेस कैंप में टेंट की जगह प्री-फैब्रिकेटेड और फाइबर स्ट्रक्चर बनाए जा रहे हैं। इससे श्रद्धालुओं को आरामदायक और आधुनिक आवास जैसी सुविधा मिल सकेगी।
ये स्ट्रक्चर तापमान में अचानक गिरावट और बारिश से निपटने में कारगर रहेंगे। हर इमारत में 48 कमरे हैं। हर कमरे में अटैच्ड वॉशरूम हैं। गर्म-ठंडे पानी की सुविधाएं होंगी। हर इमारत में पैंट्री भी बनाई जा रही है। इन जगहों पर तीन साल पहले काम शुरू हुआ था, जो अब पूरा होने वाला है।
इस बार बाढ़ वाली जगह पर कैंप नहीं लगाए जाएंगे
- इस साल सभी संवेदनशील हिस्सों और आपदा की आशंका वाले स्थानों को तीर्थयात्रियों के लिए ‘नो-एंट्री जोन’ घोषित किया गया है।
- बालटाल और नुनवान रास्तों के दोनों ट्रैक को चौड़ा किया गया है। पुलों को भी बेहतर बनाया गया है।
- बादल फटने और अचानक बाढ़ की घटनाओं को देखते हुए संवेदनशील जगहों पर कैंप नहीं लगाए जाएंगे।
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