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एयर इंडिया ने टेवोल्डे गेब्रेमैरियम को अपना नया चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर यानी CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर यानी MD यानी नियुक्त किया है। यह फैसला पूर्व सीईओ कैंपबेल विल्सन के इस्तीफे और एयरलाइन के घाटे से उबरने की धीमी रफ्तार के बीच लिया गया है।
कैंपबेल विल्सन ने जुलाई 2022 में एयर इंडिया की कमान संभाली थी। घाटे और कंपनी के सुधार में हो रही देरी के बीच उन्होंने अपने पद से 2024 में इस्तीफा दे दिया था, जिसे बोर्ड ने स्वीकार कर लिया था। विल्सन नए उत्तराधिकारी की नियुक्ति तक नोटिस पीरियड के दौरान अपने पद पर बने रहे।

विल्सन नए उत्तराधिकारी की नियुक्ति तक नोटिस पीरियड के दौरान अपने पद पर बने रहे।
अफ्रीकी एविएशन इंडस्ट्री के बड़े चेहरों में गिने जाते हैं टेवोल्डे
टेवोल्डे गेब्रेमैरियम एक इथियोपियन बिजनेस एग्जीक्यूटिव हैं और उन्हें अफ्रीका के सबसे सफल एविएशन लीडर्स में से एक माना जाता है। उन्होंने 2011 से 2022 तक इथियोपियन एयरलाइंस ग्रुप के ग्रुप चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के रूप में काम किया।

टेवोल्डे गेब्रेमैरियम ने 2011 से 2022 तक इथियोपियन एयरलाइंस ग्रुप के ग्रुप चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के रूप में काम किया।
11 साल के कार्यकाल में 4 गुना किया एयरक्रॉफ्ट फ्लीट
टेवोल्डे के 11 साल के कार्यकाल के दौरान इथियोपियन एयरलाइंस ने तेजी से विस्तार किया और अफ्रीका की सबसे बड़ी एयरलाइन बन गई:
- विमानों की संख्या बढ़ाना: एयरलाइन का बेड़ा 33 एयरक्राफ्ट से बढ़कर 130 एयरक्राफ्ट हो गया।
- यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी: कोविड-19 महामारी से पहले सालाना यात्रियों की संख्या 30 लाख से बढ़कर 1.2 करोड़ तक पहुंच गई।
- रेवेन्यू में बंपर उछाल: उनके नेतृत्व में एयरलाइन का सालाना रेवेन्यू लगभग 1 अरब डॉलर से बढ़कर 4.5 अरब डॉलर यानी लगभग ₹37,500 करोड़ हो गया।
महामारी में बिना सरकारी मदद के एयरलाइन को फायदे में रखा
कोविड-19 महामारी के दौरान जब दुनिया भर की विमानन कंपनियां दिवालिया होने की कगार पर थीं और सरकारी वित्तीय पैकेज पर निर्भर थीं, तब टेवोल्डे ने कार्गो यानी माल ढुलाई ऑपरेशन्स का तेजी से विस्तार किया। इसके दम पर उन्होंने इथियोपियन एयरलाइंस को बिना किसी सरकारी बेलआउट पैकेज के मुनाफे में बनाए रखा।
मार्च 2022 में, लगभग एक साल से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझने के कारण उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। अब वह एयर इंडिया की कमान संभालकर टाटा ग्रुप के एविएशन बिजनेस को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का प्रयास करेंगे।
एअर इंडिया के लिए आगे क्या चुनौतियां हैं?
नए CEO के सामने सबसे बड़ी चुनौती पुरानी पड़ चुकी फ्लीट यानी पुराने विमानों को सुधारना और एयरलाइन के वर्क कल्चर को टाटा के मानकों के अनुरूप ढालना होगा। एअर इंडिया फिलहाल इंडिगो के साथ मार्केट शेयर की जंग लड़ रही है।
साथ ही अंतरराष्ट्रीय रूट पर एमिरेट्स और कतर एयरवेज जैसे बड़े खिलाड़ियों से मुकाबला करने के लिए सर्विस क्वालिटी में सुधार की जरूरत है।
2026 में एअर इंडिया को करीब 20,000 करोड़ नुकसान की आशंका
भारत की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी एअर इंडिया इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में एयरलाइन को लगभग ₹20,000 करोड़ तक का नुकसान हो सकता है। नुकसान का सबसे बड़ा कारण वेस्ट में जारी तनाव है।
वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के कारण एयरस्पेस प्रतिबंध लगे हैं, जिससे एयरलाइन को फ्लाइट्स के रूट बदलने और अतिरिक्त फ्यूल स्टॉप लेने पड़ रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा असर लॉन्ग-हॉल इंटरनेशनल रूट्स पर पड़ा है और ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ गई है।
इसके साथ ही, नए विमानों की डिलीवरी में देरी से एयरलाइन की क्षमता बढ़ाने की योजना प्रभावित हो रही है, जिससे ऑपरेशंस पर दबाव बढ़ा है। इसके अलावा एअर इंडिया अभी भी पिछले साल हुए प्लेन क्रैश के असर से जूझ रही है।
अहमदाबाद से लंदन जा रही फ्लाइट AI 171 टेक-ऑफ के तुरंत बाद क्रैश हो गई थी, जिसमें 260 लोगों की मौत हुई थी। इस घटना का असर अब भी एयरलाइन की पब्लिक इमेज और ऑपरेशनल माहौल पर दिख रहा है। इन चुनौतियों के बीच कंपनी रीस्ट्रक्चरिंग और विस्तार योजनाओं पर काम जारी रखे हुए है।

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