अमेरिका की टॉप 1% कंपनियां अब एआई टूल्स पर हर कर्मचारी के लिए औसतन करीब 7 लाख रुपए खर्च कर रही हैं। रैम्प के एआई इंडेक्स की रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी में यही कंपनियां प्रति कर्मचारी करीब 2.47 लाख रुपए खर्च कर रही थीं। यानी 7 महीनों में खर्च लगभग 3 गुना हो गया। टॉप 10% कंपनियां एआई पर करीब 62 हजार रुपए प्रति कर्मचारी खर्च कर रही हैं। औसत खर्च करीब 1140 रुपए प्रति कर्मचारी बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक एंथ्रोपिक और ओपनएआई जैसी कंपनियां अब प्रति-टोकन मॉडल पर आ गई हैं। इसमें इस्तेमाल किए गए टोकन के हिसाब से पैसा लिया जाता है। यानी एआई से जितना ज्यादा काम, उतने ज्यादा टोकन और उतना ज्यादा बिल। हाल के महीनों में उबर, अमेजन और वॉलमार्ट ने जरूरत से ज्यादा एआई इस्तेमाल रोकने के लिए लिमिट लगाई है। एआई बॉस ने इंसानी कर्मचारी को नौकरी से निकाला दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर प्रयोग चल रहे हैं। सैन फ्रांसिस्को में एंडोन लैब नाम की फर्म ने लूना नामक एआई को एक रिटेल स्टोर चलाने की जिम्मेदारी सौंपी। हाल ही में लूना ने अपने एक इंसानी कर्मचारी को बर्खास्त करने की सिफारिश की। वह कर्मचारी 23 में से 17 शिफ्टों में देर से आया था। बाद में इंसानी कर्मचारियों ने इस सिफारिश को रिव्यू किया और उस कर्मचारी को बर्खास्त कर दिया। एंडोन मार्केट ने अपने सोशल मीडिया पेज पर लिखा ‘पहली बार (हमारी जानकारी के अनुसार) किसी एआई बॉस ने किसी इंसानी कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया है। सैन फ्रांसिस्को में हमारे स्टोर को चलाने वाली एआई लूना ने बार-बार देर से आने के कारण एक कर्मचारी को बर्खास्त करने का फैसला किया। उस समय लूना क्लाउड ओपस 4.8 पर चल रही थी, लेकिन अधिकांश मॉडल ऐसा ही करते।’ अपनी अटेंडेंस नीति को भूल गया था एआई एंडोन लैब्स के मुताबिक लूना ने महीनों पहले अटेंडेंस संबंधी नीति बनाई थी, लेकिन बाद में वह उसे भूल गई। इसका नतीजा ये हुआ कि देर से आने वाला कर्मचारी कई महीनों तक वही गलती दोहराता रहा। आखिरकार एंडोन लैब्स ने लूना को अपनी मेमोरी में बनाई गई नीतियों को खोजने के लिए कहा और फिर उससे यह आकलन करने को कहा कि क्या कर्मचारी अभी भी कंपनी के लिए उपयुक्त है। इसके बाद लूना ने कर्मचारी को नौकरी से बर्खास्त करने की सिफारिश की।
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