ये तस्वीर एक मई की है, जब आदि कैलाश यात्रा शुरू हुई थी।
उत्तराखंड सरकार आदि कैलाश यात्रा सालभर चलाने की तैयारी में है। इसके लिए पिथौरागढ़ प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। अभी यात्रा खराब मौसम के चलते रोकी गई है, जिसे 15 सितंबर से फिर शुरू किया जाएगा। एक मई से शुरू हुई इस यात्रा में अब तक 52 हजार से ज्यादा
डीएम आशीष भटगांई ने बताया कि अगर सबकुछ ठीक रहा तो इसी साल इसे सालभर के लिए शुरू कर सकते हैं। इसको देखते हुए इलाके में 550 से ज्यादा नए होमस्टे बनाए गए हैं। आदि कैलाश में अभी मोबाइल नेटवर्क कमजोर आते हैं, जिसके लिए तेजी से काम किया जा रहा है। अभी वहां केवल BSNL और जियो के नेटवर्क आते हैं।
बाकी कंपनियों से भी संपर्क किया जा रहा है। पीएम मोदी ने 2023 में आदि कैलाश के दर्शन किए थे। तभी से इस यात्रा को सालभर चलाने की तैयारियां शुरू की गईं। यह पीएम मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट भी है। चार साल पहले तक यहां केवल दो हजार यात्री आते थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 25 गुना हो गई है।

अक्टूबर 2023 में पीएम मोदी ने आदि कैलाश में लगाया था ध्यान
अक्टूबर 2023 में पीएम नरेंद्र मोदी ने आदि कैलाश के दर्शन किए थे। इसके बाद पिथौरागढ़ में आयोजित जनसभा में उन्होंने कहा था, “अभी से तैयारी कर लो, अगले साल इतनी भीड़ आएगी कि संभालना मुश्किल होगा।” उनका यह अनुमान सही साबित हुआ।
मोदी के दौरे के बाद क्षेत्र राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया और श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती गई। DM आशीष भटगांई ने बताया कि यदि मौसम और व्यवस्थाएं अनुकूल रहीं तो इसी साल यात्रा को वर्षभर संचालित करने की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा। कैलाश मानसरोवर और आदि कैलाश यात्रा का संचालन समन्वय के साथ किया जाएगा, ताकि दोनों यात्राएं सुचारु रूप से चल सकें।

पिथौरागढ़ में स्थित आदि कैलाश की फाइल फोटो।
पहले 100 किमी पैदल, अब एक दिन में दर्शन
कुछ साल पहले तक आदि कैलाश पहुंचना बेहद कठिन था। यात्रियों को तवाघाट से करीब 100 किलोमीटर पैदल यात्रा करनी पड़ती थी और पूरी यात्रा में लगभग 7 दिन लगते थे। 2018 में सड़क बनने के बाद अब श्रद्धालु धारचूला से वाहन के जरिए एक दिन में आदि कैलाश पहुंचकर दर्शन कर रहे हैं और अगले दिन ओम पर्वत के दर्शन कर लौट सकते हैं।

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हिमालय की ऊंची चोटियां, गहरी घाटियां, बर्फ से ढके दर्रे और देवस्थल मेरी पहचान हैं। मेरी इन्हीं सीमांत पहाड़ियों में एक ऐसा धाम भी है, जहां प्रकृति और आस्था एक-दूसरे का हाथ थामे खड़ी दिखाई देती हैं। यह है आदि कैलाश।
पिथौरागढ़ जिले की कुटी घाटी में भारत-नेपाल-तिब्बत की सीमाओं के पास स्थित आदि कैलाश को लोग छोटा कैलाश, शिव कैलाश और जोंगलिंगकांग पीक के नाम से भी जानते हैं। समुद्र तल से 5,945 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह पर्वत पंच कैलाशों में दूसरा महत्वपूर्ण कैलाश माना जाता है। (पढ़ें पूरी खबर)
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