खास बात यह है कि MSCI बदलावों के बाद कुछ अडानी (Adani) कंपनियों में संभावित फंड इनफ्लो की उम्मीद भी जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार अडानी इंटरप्राइसेस (Adani Enterprises) में करीब 202 मिलियन डॉलर, अडानी पोर्ट्स (Adani Ports) में लगभग 77 मिलियन डॉलर और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस में करीब 310 मिलियन डॉलर का संभावित इनफ्लो हो सकता है। MSCI ने अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पोर्ट्स और एसईजेड (SEZ) और अडानी पावर समेत कुछ मौजूदा कंपनियों का इंडेक्स वेटेज बढ़ाया है। इसके चलते लंबे समय में इन शेयरों में पैसिव फंड्स फ्लोज का फायदा मिल सकता है, लेकिन रीबैलेंसिंग के दिन खरीद-बिक्री की वजह से शेयरों में भारी वोलैटिलिटी भी देखने को मिलती है।
सिर्फ MSCI ही नहीं, बाजार पर भी दबाव
अडानी ग्रुप (Adani Group) के शेयरों में गिरावट ऐसे समय आई, जब पूरे भारतीय शेयर बाजार में भी कमजोरी रही। निफ्टी (Nifty) करीब 95 अंक गिरकर 24,080 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स (Sensex) 307 अंक कमजोर होकर 76,957 पर आ गया। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने भी घरेलू निवेशकों का सेंटीमेंट प्रभावित किया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों और महंगाई को लेकर टिप्पणियों के बाद US बॉन्ड यील्ड में तेजी आई। अमेरिका की 10-ईयर ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 4.74% और 30-ईयर यील्ड 5.22% तक पहुंच गई। ऊंची बॉन्ड यील्ड से दुनियाभर के इक्विटी बाजारों पर दबाव बढ़ सकता है।
इसके अलावा वेस्ट एशिया में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में 2% से ज्यादा की तेजी ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। ऐसे माहौल में अडानी ग्रुप (Adani Group) के शेयरों में आई तेज गिरावट को केवल किसी एक कंपनी की खबर से जोड़ना सही नहीं होगा। MSCI रीबैलेंसिंग, कमजोर घरेलू बाजार, बढ़ती बॉन्ड यील्ड और जियोपॉलिटिकल टेंशन- इन सभी का असर मिलकर बाजार की वोलैटिलिटी बढ़ा रहा है। इसलिए निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे सिर्फ एक दिन की गिरावट देखकर जल्दबाजी में Buy या Sell का फैसला न लें और संबंधित कंपनी के वैल्युएशन, फंडामेंटल, डेब्ट, अर्निंग और आगे की ग्रोथ प्रॉसपेक्ट को ध्यान में रखकर निवेश निर्णय लें।
डिस्क्लेमर- किसी भी स्टॉक में निवेश से पहले एक्सपर्ट की राय जरूर लें।
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