ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच अब एक नई कूटनीतिक पहल सामने आई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उम्मीद और अनिश्चितता दोनों को बढ़ा दिया है। मौजूद जानकारी के अनुसार, ईरान ने युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के उद्देश्य से अमेरिका के सामने 14 सूत्रीय प्रस्ताव रखा है, जिसे पाकिस्तान के माध्यम से भेजा गया।
बताया जा रहा है कि यह प्रस्ताव उस समय आया है जब दोनों देशों के बीच 8 अप्रैल से लागू युद्धविराम के बावजूद कोई ठोस शांति समझौता नहीं हो सका है। गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस नए प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह इसे देख रहे हैं, लेकिन फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि इससे कोई समझौता हो पाएगा या नहीं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, ईरान का यह नया प्रस्ताव अमेरिका की पहले पेश की गई नौ सूत्रीय योजना के जवाब में तैयार किया गया है। जहां अमेरिकी योजना में सीमित समय के युद्धविराम पर जोर था, वहीं ईरान ने अब सीधे युद्ध खत्म करने और सभी मुद्दों को 30 दिनों के भीतर सुलझाने की बात कही है।
ईरान की मांगों में भविष्य में किसी भी तरह के हमले से सुरक्षा की गारंटी, उसके आसपास तैनात अमेरिकी बलों की वापसी, आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना, रुके हुए अरबों डॉलर के फंड को जारी करना और युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई शामिल है। इसके अलावा, होरमुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही के लिए एक नया सिस्टम बनाने की बात भी कही गई है।
गौरतलब है कि होरमुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अहम मार्ग है, जहां से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और गैस गुजरता है। हाल के महीनों में यहां बढ़े तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी असर पड़ा है।
बताया जा रहा है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी अपने अधिकारों की सुरक्षा चाहता है, जबकि अमेरिका ने इसे अपनी प्रमुख शर्त बताया है। इसी मुद्दे पर दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा मतभेद बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यही कारण है कि अब तक कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आ पाया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री क्षेत्र में तनाव अभी भी जारी है और दोनों पक्ष एक-दूसरे के जहाजों को रोकने और कार्रवाई करने में लगे हुए हैं। इससे साफ है कि युद्धविराम के बावजूद स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है।
बताया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी भी दी है कि यदि ईरान की ओर से कोई आक्रामक कदम उठाया गया तो सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू हो सकती है। वहीं दूसरी ओर, विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास की स्थिति भी शांति वार्ता में बड़ी बाधा बनी हुई है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी दोनों देशों के बीच कई प्रस्ताव सामने आ चुके हैं, लेकिन किसी पर सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे में यह नया प्रस्ताव कितना प्रभावी साबित होगा, यह आने वाले दिनों में ही साफ हो पाएगा। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी रहने की संभावना जताई जा रही है, जिससे समाधान की उम्मीद बनी हुई है।
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