महाराजा भूपिंदर सिंह की परपोती और भारतीय खेल निशानेबाज राजेश्वरी कुमारी ने हाल ही में शाही धरोहर की एक झलक साझा की है। इसमें पटियाला राजघराने का इतिहास, विरासत और पुरानी धरोहर की खूबसूरती देखने को मिली है।
खेलों से जुड़ा हुआ है पटियाला राजघराने का इतिहास
पटियाला राजघराना हमेशा से ही खेलों से जुड़ा हुआ रहा है। इसकी पहली झलक ही घर की दीवारों पर साफ देखने को मिल जाती है। राजेश्वरी इसे अपनी मां का ‘म्यूजियम’ बताते हुए कहती हैं कि यहां खेलों से जुड़ी पूरी जिंदगी को संजोकर रखने की कोशिश की गई है। दीवारों पर लगी कई तस्वीरें और कई पदक, पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा को ही दर्शाते हैं।
इसी दौरान राजेश्वरी अपने पिता राजा रणधीर सिंह की ऐतिहासिक जीत के बारे में भी बताती हैं। दरअसल साल 1978 में राजा रणधीर सिंह भारत के पहले एशियाई खेल स्वर्ण पदक विजेता बने थे। इसी परंपरा को अब राजेश्वरी आगे बढ़ा रही हैं। वो जानी-मानी ट्रैप शूटर हैं और एशियाई खेलों और एशियाई निशानेबाजी चैंपियनशिप में पदक जीत चुकी हैं।
घर में सजी महारानियों से जुड़ी कलाकृतियाँ
शाही परिवार की विरासत सिर्फ मेडल्स और पेंटिंग्स पर ही खत्म नहीं होती, बल्कि यहां कई शाही कलाकृतियां भी मौजूद हैं। इनका कलेक्शन दिखाते हुए राजेश्वरी कई बार मुगल और पहाड़ी चित्रकला का जिक्र करती हैं। इनमें से सबसे खास है एक मार्बल की प्रतिमा, जो राजेश्वरी के दिल के सबसे करीब है। वो बताती हैं कि ये उनकी परदादी की प्रतिमा है, उन दिनों सभी महारानियों के लिए इस तरह की प्रतिमा बनवाई जाती थीं।
विरासत में पन्ने के झुमकों और चांदी की कढ़ाई लहंगा भी शामिल
इस शाही विरासत में कुछ ऐसी चीजें भी शामिल हैं, जिन्हें आज राजेश्वरी खुद इस्तेमाल कर रही हैं। वो अपनी परदादी के पन्ने वाले झुमकों का जिक्र करती हैं, जिन्हें वो खुद पहनती हैं। इसके साथ ही उनकी फुलकारी और चांदी की कढ़ाई वाला लहंगा भी दिखाती हैं। खास बात ये है कि शाही परिवार ने इस लहंगे को केवल संभालकर ही नहीं रखा है, बल्कि इसे दोबारा पहनने लायक बनाने का फैसला किया है।
राजेश्वरी बताती हैं कि उनकी परदादी के लहंगे में जो चांदी की एंब्रॉयडरी है, उसे पुराने लहंगे से निकालकर नए लहंगे पर बिल्कुल उसी ढंग में लगाया जा रहा है। एक तरह से देखें तो अब ये परिधान सिर्फ एक पुरानी धरोहर नहीं रह गया है, बल्कि इतिहास और शाही फैशन को वर्तमान से जोड़ने वाली अनमोल धरोहर बन गया है।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.