EX-Dividend Date: मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ. प्रमुख इंडेक्स निफ्टी 50 करीब 0.49 प्रतिशत से टूटकर 23,913.70 के स्तर पर बंद हुआ. बाजार के कमजोर होते ही निवेशकों की नजर अब उन बड़ी कंपनियों पर टिकी हुई हैं, जिन्होंने मई 2026 के लिए डिविडेंड और एक्स-डिविडेंड डेट का ऐलान किया है.
इस लिस्ट में आईटीसी लिमिटेड, बजाज ऑटो, टोरेंट फार्मास्युटिकल्स, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस, और बैंक ऑफ इंडिया जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं.
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एक्स-डिविडेंड डेट क्या है?
एक्स-डिविडेंड डेट वो तारीख है, जो तय करती है कि किसी निवेशक को कंपनी का घोषित डिविडेंड मिलेगा या नहीं. अगर किसी निवेशक को डिविडेंड का फायदा लेना है, तो उसे एक्स-डिविडेंड डेट से पहले शेयर खरीदने होते हैं. अगर शेयर एक्स-डेट वाले दिन या उसके बाद खरीदे जाते हैं, तो उस डिविडेंड का अधिकार पुराने शेयरधारक के पास ही रहता है. इसी वजह से डिविडेंड में रुचि रखने वाले निवेशक इन तारीखों का खास ख्याल रखते हैं.
इन कंपनियों पर है निवेशकों की नजर?
आईटीसी लिमिटेड
ये देश की सबसे बड़ी विविध कारोबार वाली कंपनियों में गिनी जाती है. कंपनी FMCG, सिगरेट, होटल, पैकेजिंग और एग्री बिजनेस जैसे क्षेत्रों में काम करती है. ITC लंबे समय से लगातार डिविडेंड देने के लिए जानी जाती है.
बजाज ऑटो
ये भारत की प्रमुख टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर वाहन निर्माता कंपनी है. पल्सर और डोमिनार जैसे लोकप्रिय ब्रांड्स के कारण कंपनी की मजबूत पहचान है. मजबूत कैश फ्लो की वजह से कंपनी को निवेशक पसंद करते हैं.
टोरेंट फार्मास्यूटिकल्स
ये दवा क्षेत्र की बड़ी कंपनियों में शामिल है. जिसमें हार्ट संबंधी बीमारियां, डायबिटीज और अन्य बीमारियों की दवाइयों के कारोबार में निवेश किया जाता है.
ICICI लोम्बार्ड
ये निजी क्षेत्र की बड़ी जनरल इंश्योरेंस कंपनी है, जो मोटर, हेल्थ और ट्रैवल इंश्योरेंस जैसी सेवाएं देती है.
बैंक ऑफ इंडिया
ये सार्वजनिक क्षेत्र का बड़ा बैंक है, जो रिटेल बैंकिंग, कॉर्पोरेट लोन और डिजिटल बैंकिंग सेवाओं पर तेजी से काम कर रहा है.
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डिविडेंड स्टॉक्स क्यों पसंद करते हैं निवेशक?
डिविडेंड देने वाली कंपनियों को आमतौर पर मजबूत और स्थिर माना जाता है. ऐसे स्टॉक्स निवेशकों को नियमित आय के साथ लंबी अवधि में पूंजी बढ़ाने का मौका भी देते हैं. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को केवल ज्यादा डिविडेंड देखकर निवेश नहीं करना चाहिए. कंपनी की वित्तीय स्थिति, भविष्य की ग्रोथ और वैल्यूएशन को भी ध्यान में रखना जरूरी है.
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