1- मुख्य डिमांड OPS की बहाली
पेंशनर्स फोरम की सबसे प्रमुख मांग पुरानी पेंशन योजना यानी OPS की बहाली रही। यह डिमांड लंबे समय से सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के अलग-अलग संगठनों की ओर से उठाई जाती रही है। फोरम का कहना है कि रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को बेहतर और भरोसेमंद वित्तीय सुरक्षा मिलनी चाहिए।
2- पेंशन और फैमिली पेंशन में बढ़ोतरी
दूसरी बड़ी मांग पेंशन और फैमिली पेंशन में बढ़ोतरी की है। फोरम ने कहा कि बढ़ती महंगाई और डेली के खर्च को देखते हुए पेंशनर्स व उनके परिवारों को अधिक आर्थिक सहायता की जरूरत है। खासतौर पर परिवार पेंशन में सुधार से आश्रित परिवारों को राहत मिल सकती है।
3- कम्यूटेड पेंशन की रिकवरी से राहत
तीसरी डिमांड कम्यूटेड पेंशन की रिकवरी से राहत को लेकर है। पेंशन का एक हिस्सा कम्यूट कराने वाले पेंशनर्स की मासिक पेंशन पर इसका असर पड़ता है। फोरम ने इस संबंध में नियमों और रिकवरी की शर्तों में राहत तथा स्पष्टता की मांग रखी है।
4- MACP में बदलाव
चौथी अहम मांग MACP (Modified Assured Career Progression) में बदलाव की है। प्रतिनिधियों ने बेहतर करियर प्रोग्रेशन और वेतन संरचना की मांग की, ताकि कर्मचारियों को लंबे समय तक सेवा देने के दौरान वित्तीय लाभ मिल सकें।
5- भत्तों, छुट्टियों में सुधार की मांग
इसके अलावा फोरम ने भत्तों, छुट्टियों और सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं में सुधार की मांग भी रखी। अन्य मांगों में ₹68,000 का न्यूनतम वेतन, स्थायी वेतन संशोधन व्यवस्था और मौजूदा पे मैट्रिक्स के साथ ‘रनिंग स्केल’ लागू करने का सुझाव शामिल है। महिलाओं और दिव्यांग कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
चंडीगढ़ में अगली बैठकें
8वां वेतन आयोग न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित किया गया है। आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। फिलहाल आयोग की अगली बैठकें 16, 17 और 18 सितंबर को चंडीगढ़ में प्रस्तावित हैं। हालांकि पेंशन, वेतन और भत्तों में अंतिम बदलाव आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार के फैसले पर निर्भर करेंगे।
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