इन मामलों में शामिल राशि भी बढ़कर 46,559.84 करोड़ रुपये हो गई, जबकि एक साल पहले यह 30,121.98 करोड़ रुपये थी। वसूली की राशि भी बढ़ी है, जो 1,287.86 करोड़ से बढ़कर 2,788.38 करोड़ रुपये हो गई।
तीन साल की गिरावट के बाद धोखाधड़ी के मामले फिर बढ़े
लंबी अवधि के आंकड़े बताते हैं कि बड़े धोखाधड़ी के मामले लगातार तीन साल घटते रहे, लेकिन वित्तीय वर्ष 2025 से इनमें फिर से बढ़ोतरी शुरू हो गई। वित्तीय वर्ष 2021 में 1,066 मामलों में 97,508.55 करोड़ रुपये शामिल थे, और सिर्फ 510.06 करोड़ रुपये की वसूली हुई। 2022 में मामलों की संख्या घटकर 889 रह गई, जिसमें 34,126.47 करोड़ रुपये शामिल थे और 374.27 करोड़ रुपये वसूल किए गए।
2023 में यह संख्या और घटकर 740 हो गई, जिसमें 14,312.78 करोड़ रुपये शामिल थे और 980.09 करोड़ रुपये की वसूली हुई। वित्तीय वर्ष 2024 में मामले छह साल के निचले स्तर 641 पर आ गए, जिनमें 9,080.50 करोड़ रुपये शामिल थे और 342.48 करोड़ रुपये वसूल किए गए। इसके बाद रुख पलटा और 2025 में मामले बढ़कर 941 हो गए, और 2026 में यह संख्या 1,330 तक पहुंच गई, जो 2024 के स्तर से दोगुने से भी अधिक है।
छह वर्षों में कुल धोखाधड़ी और वसूली का अंतर
इन छह वित्तीय वर्षों के दौरान रिपोर्ट की गई धोखाधड़ी में कुल 2,31,710.12 करोड़ रुपये शामिल थे, जबकि कुल वसूली सिर्फ 6,283.14 करोड़ रुपये रही। इस प्रकार दोनों के बीच का अंतर 2,25,426.98 करोड़ रुपये है। गौरतलब है कि यह वसूली की राशि उस अवधि में जुटाई गई है और इसे धोखाधड़ी का अंतिम नुकसान नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि कुछ मामलों में बाद में भी वसूली हो सकती है।
इसके अलावा वित्त मंत्रालय ने यह भी बताया कि जनवरी से 5 अगस्त, 2026 के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की कुल बिक्री 29.8 लाख करोड़ रुपये रही। यह आंकड़ा नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड के डेटा पर आधारित है और यह कुल बिक्री को दर्शाता है, न कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के शुद्ध प्रवाह को।
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