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- 40% More Devotees Than Capacity In Kedarnath, Struggle 12,000 Feet Above
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प्रशासन ने इस बार यात्री क्षमता बढ़ाकर 22 से 24 हजार की है, लेकिन यात्रा के पहले दिन से ही इससे ज्यादा श्रद्धालु आ रहे हैं।
इस साल उत्तराखंड स्थित केदारनाथ धाम में आ रही बेहिसाब भीड़ और इन्हें संभालने के लिए की गई व्यवस्थाएं चिंता बढ़ा रही हैं। हालात ये हैं कि समुद्र तल से 12 हजार फीट ऊपर हजारों श्रद्धालु रोज दर्शन के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं, क्योंकि हर दिन औसतन 25 हजार श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं।
प्रशासन का दावा है कि इस बार यात्री क्षमता बढ़ाकर 22 से 24 हजार की है, लेकिन यात्रा के पहले दिन से ही इससे ज्यादा श्रद्धालु आ रहे हैं। इसलिए घोड़ा पड़ाव से मंदिर तक मौजूद सभी दुकानें, टेंट, गेस्ट हाउस, छोटे लॉज सब हाउसफुल हैं और इमरजेंसी में रुकना पड़े तो एक कमरे का रात का किराया 5 से 10 हजार रुपए तक जा रहा है।
5 बाय तीन के टेंट भी बमुश्किल 2 से 6 हजार रुपए में मिल पा रहे हैं। वहीं, 21 किमी नीचे गौरीकुंड और सोनप्रयाग में भी ऐसे ही हालात हैं। रुकने के लिए बजट वाली जगह मिलने में मुश्किल आ रही है।
यूं कहें कि केदारनाथ धाम इस समय चारधाम यात्रा के इतिहास के सबसे अधिक श्रद्धालुओं का गवाह बन रहा है। बीते 25 दिन में रिकॉर्ड 5.50 लाख से ज्यादा श्रद्धालु आ चुके हैं। दर्शन के लिए आधी रात से लाइन लगनी शुरू होती है, जो दिनभर में भी 1 से 2 किमी लंबी बनी रहती है।
यदि सुबह 4 बजे लाइन में लगे तो 8 से 10 घंटे बाद ही मंदिर तक पहुंच पाते हैं। 21 किमी चढ़ाई के बाद डेढ़ किमी लंबी लाइन। बीकानेर से 12 सदस्यीय परिवार के साथ आए सुरेश पारिख ने बताया कि ऊपर एक कमरे का 20 हजार रु. मांग रहे थे, मोलभाव के बाद 12 हजार में बात बनी। सारा कैश कमरा और भोजन में खत्म हो गया।
सुबह चार बजे दर्शन के लिए लाइन में लगे तो दोपहर एक बजे मंदिर पहुंच पाए। दर्शन भी बाहर से हुए। रुकना चाहते थे, लेकिन बजट नहीं था तो लौटना पड़ा। दरअसल, शिवलिंग को स्पर्श करने का समय सुबह 4 से दोपहर 12 बजे तक तय किया गया है। इसके बाद भोजन, हवन, शृंगार के लिए मंदिर के कपाट बंद कर देते हैं। इसलिए हर श्रद्धालु इससे पहले ही दर्शन के लिए जद्दोजहद कर रहा है।
पिछले साल केदारनाथ धाम की कैरिंग कैपेसिटी यानी वहन क्षमता मात्र 13 हजार थी, जो इस बार बढ़ाई गई है। सिर्फ 12 नई जगह ज्यादा संख्या में टेंट लगवाए गए हैं। कुछ नई इमारतें भी बनी हैं, जिनमें ऑन स्पॉट जगह होने पर ही रुकने की सुविधा मिल पाती है।
ऊपर से एक किमी क्षेत्र में करीब 500 छोटी-छोटी दुकानें हैं, जिनमें दो से तीन लोग खुद रुकते हैं। इस तरह घोड़ा पड़ाव से मंदिर तक हरेक जगह हाउसफुल बनी हुई है। लंबी लाइनों में थकान और झुंझलाहट के कारण यात्रियों के बीच विवाद आम हो गए हैं। मई के अंत से स्कूलों की छुट्टियां पड़ने पर धाम में भीड़ और अधिक बढ़ने का अनुमान है।
भीड़ ने यात्रा का स्वरूप बिगाड़ा
केदारसभा- केदारसभा मंदिर समिति के अध्यक्ष राजकुमार तिवारी ने बताया कि इस बार भीड़ यात्रा का स्वरूप बिगाड़ रही है। धाम की मर्यादा, यात्रियों व व्यापारियों की सुविधाओं पर प्रभाव पड़ रहा है। वहीं, उखीमठ के उपजिलाधिकारी अनिल राणा ने बताया कि दर्शन के समय को लेकर हो रही परेशानी दूर करने के लिए नई व्यवस्था बना रहे हैं।
समस्या क्यों
– 12 घंटे की चढ़ाई के बाद 8-10 घंटे दर्शन में लग रहे, तुरंत लौटना मुश्किल, इसलिए रात ऊपर ही बिताने की मजबूरी, अगले दिन फिर नई भीड़।
2500 रुपए में वीआईपी दर्शन, इससे आम लोगों का इंतजार बढ़ रहा
– दर्शन का इंतजार वीआईपी व्यवस्था के कारण भी बिगड़ा है। हेलीकॉप्टर से आने वाले श्रद्धालु मंदिर समिति को 2500 रु. शुल्क देते हैं, इसलिए उन्हें गर्भगृह में पहले जाने दे रहे। इस कारण बाहर लाइन में लगे श्रद्धालुओं के दर्शन का इंतजार बढ़ जाता है।
– केदार धाम में इतनी भीड़ के लिए शौचालय की संख्या बहुत कम पड़ रही है। सुलभ इंटरनेशनल के प्रभारी धनंजय पाठक के मुताबिक 239 शौचालय ही हैं। अब 60 नए बना रहे हैं। 412 सफाईकर्मी हैं, जो कई बार 20-20 घंटे ड्यूटी कर रहे हैं।
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