हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए दूसरे वनडे में जिम्बाब्वे ने बांग्लादेश को 13 रन से हराकर तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली। पहले बल्लेबाजी करते हुए जिम्बाब्वे ने 6 विकेट पर 247 रन बनाए। जवाब में बांग्लादेश की टीम 48.1 ओवर में 234 पर ऑल आउट हो गई। जिम्बाब्वे की जीत के हीरो सलामी बल्लेबाज बेन कुरेन रहे, जिन्होंने नाबाद 111 रन की पारी खेलकर जिम्बाब्वे ने पारी संभाली। आखिर में ब्रैड इवांस ने तेज बल्लेबाजी करते हुए नाबाद 58 रन बनाए। दोनों ने सातवें विकेट के लिए अटूट 99 रन जोड़े। शुरुआती झटकों के बीच कुरेन ने संभाली पारी हरारे स्पोर्ट्स क्लब में सुबह 9:30 बजे शुरू हुए मैच में पिच पर नमी थी और गेंदबाजों को अच्छी मदद मिल रही थी। इसका फायदा उठाते हुए बांग्लादेश ने 32 रन तक जिम्बाब्वे के तीन विकेट गिरा दिए। इसके बाद बेन कुरेन ने जिम्मेदारी संभाली। शुरुआत में वह थोड़े संघर्ष करते नजर आए, लेकिन सेट होने के बाद उन्होंने संयम और आक्रामक बल्लेबाजी का अच्छा संतुलन दिखाया। उन्होंने नाबाद 118 रन बनाकर अपने वनडे करियर का दूसरा शतक पूरा किया। इसके साथ ही वह जिम्बाब्वे के सातवें बल्लेबाज बने, जिन्होंने वनडे की एक पारी में पूरे 50 ओवर बल्लेबाजी की। कुरेन को 4 रन के निजी स्कोर पर जीवनदान भी मिला। तौहीद हृदोय ने शॉर्ट कवर पर उनका मुश्किल कैच छोड़ दिया। इवांस और कुरेन के बीच 99* रन की साझेदारी जिम्बाब्वे की पारी के आखिर में ब्रैड इवांस ने तेजी से रन बटोरे। नंबर-8 पर उतरे इवांस ने पहली 7 गेंदों में सिर्फ 2 रन बनाए, लेकिन इसके बाद आक्रामक अंदाज अपनाया। पारी के आखिरी ओवर में उन्होंने तस्कीन अहमद की लगातार तीन गेंदों पर तीन छक्के लगाए। इवांस 58 रन बनाकर नाबाद लौटे। जिम्बाब्वे की पारी में लगे सभी 5 छक्के उन्हीं के बल्ले से आए। इवांस और कुरेन की 99 रन की नाबाद साझेदारी ने जिम्बाब्वे को मजबूत स्कोर तक पहुंचा दिया। मधेवेरे और रजा अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में नहीं बदल सके वेस्ली मधेवेरे ने नाहिद राना के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 13वें ओवर में 11 रन बटोरे, लेकिन कुछ देर बाद आउट हो गए। इसके बाद सिकंदर रजा ने बेन कुरेन के साथ चौथे विकेट के लिए 68 रन जोड़े। हालांकि वह अपनी अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में नहीं बदल सके और मेहदी हसन मिराज की गेंद पर कवर में कैच दे बैठे। इसके बाद क्लाइव मदांडे भी जल्दी पवेलियन लौट गए। एक समय जिम्बाब्वे का स्कोर 148 रन पर 6 विकेट था, लेकिन कुरेन और इवांस ने टीम को संकट से निकालते हुए मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। बांग्लादेश की रणनीति नहीं चली बांग्लादेश ने इस मैच में मुस्तफिजुर रहमान की जगह शरीफुल इस्लाम को मौका दिया। टीम ने अतिरिक्त स्पिन विकल्प के तौर पर मेहदी हसन मिराज, रिशाद हुसैन और मोसद्देक हुसैन को खिलाया, लेकिन यह रणनीति असरदार साबित नहीं हुई। शुरुआत में तस्कीन अहमद और नाहिद राना ने शानदार गेंदबाजी की, लेकिन बीच और आखिरी ओवरों में जिम्बाब्वे के बल्लेबाजों ने स्पिनरों के खिलाफ आसानी से रन बनाए। खासकर आखिरी ओवरों में कुरेन और इवांस ने तेजी से रन जुटाकर मैच का रुख बदल दिया। 169 रन पर 3 विकेट से बिखरी बांग्लादेश की पारी 248 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए बांग्लादेश ने अच्छी शुरुआत की। एक समय टीम का स्कोर 3 विकेट पर 169 रन था और जीत की ओर बढ़ती नजर आ रही थी। तंजीद हसन ने 70 गेंदों में 57 रन बनाए, जबकि तौहीद हृदोय ने 90 गेंदों पर 60 रन की पारी खेली। दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 107 गेंदों में 84 रन जोड़कर पारी को संभाला। हालांकि, इसके बाद जिम्बाब्वे के गेंदबाजों ने मैच का रुख पलट दिया। बांग्लादेश ने 169 से 176 रन के बीच सिर्फ 7 रन जोड़कर दो विकेट गंवा दिए। इसके बाद नियमित अंतराल पर विकेट गिरते रहे। टीम ने 211 रन पर छठा और 222 रन तक पहुंचते-पहुंचते आठवां विकेट भी गंवा दिया। यहीं से मुकाबला पूरी तरह जिम्बाब्वे के पक्ष में चला गया और बांग्लादेश लक्ष्य से दूर रह गया। कप्तान नगारवा ने आखिरी स्पेल में पलटा मैच जिम्बाब्वे के कप्तान रिचर्ड नगारवा ने अंतिम ओवरों में बांग्लादेश के निचले क्रम को संभलने का मौका नहीं दिया। बांग्लादेश के आखिरी छह विकेट सिर्फ 65 रन के भीतर गिर गए। नगारवा ने अपने तीसरे स्पेल में नूरुल हसन (38) और मोसद्देक हुसैन (7) के अहम विकेट लिए। इसके बाद अपने आखिरी ओवर की अंतिम गेंद पर उन्होंने मेहदी हसन मिराज को डीप स्क्वायर लेग पर कैच आउट कराकर बांग्लादेश की पारी समाप्त कर दी। इसी के साथ जिम्बाब्वे ने मैच के साथ सीरीज भी अपने नाम कर ली। DRS नहीं होने से अंपायरिंग पर उठा विवाद सीरीज में DRS की सुविधा नहीं होने से अंपायरिंग को लेकर भी विवाद देखने को मिला। बांग्लादेश को जीत के लिए 17 गेंदों में 17 रन चाहिए थे, तभी मेहदी हसन मिराज ने एक गेंद को वाइड नहीं दिए जाने पर अंपायर से नाराजगी जताई। हालांकि नए वनडे नियमों के तहत बल्लेबाज के क्रीज में मूव करने पर गेंदबाज को अतिरिक्त छूट मिलती है और मेहदी लेग स्टंप की ओर शिफ्ट हो गए थे, इसलिए अंपायर ने गेंद को वाइड नहीं माना। इससे पहले जिम्बाब्वे की दो कैच की अपील भी ठुकराई गई थीं, जिससे मेजबान टीम भी असंतुष्ट थी। ———————————————- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… चेक टेनिस स्टार मुचोवा पहली बार विंबलडन फाइनल में:अमेरिका की गॉफ को हराया; डॉक्टरों ने कभी टेनिस छोड़ने की सलाह दी थी चेक गणराज्य की 29 साल की कारोलिना मुचोवा ने सातवीं वरीयता प्राप्त अमेरिका की कोको गॉफ को 6-2, 1-6, 7-6 (12-10) से हराकर पहली बार विंबलडन महिला सिंगल्स के फाइनल में जगह बना ली। पूरी खबर
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