महज 10000 रुपये की शुरुआती रकम से चोले-भटूरे का स्टॉल शुरू हुआ और चार दिनों में ही इसकी बिक्री ने उम्मीद से कहीं बेहतर नतीजे दिए।
नौकरी दिलाने के बजाय बिजनेस शुरू करने का दिया आइडिया
अंकित ने नौकरी की तलाश करने के बजाय उस शख्स से खुद मुलाकात की। बातचीत के बाद उन्हें लगा कि उसे नौकरी दिलाने से बेहतर होगा कि उसे अपना काम शुरू करने का मौका दिया जाए। इसके बाद उन्होंने उसके लिए एक छोटा बिजनेस आइडिया तैयार किया और उसे शुरू करने में मदद की।
अंकित ने तहसील के बाहर एक जगह तलाशकर दी, कारोबार शुरू करने के लिए 10,000 रुपये की शुरुआती रकम दी और जरूरी कच्चे माल का भी इंतजाम कराया। ग्राहकों से डिजिटल पेमेंट लेने में परेशानी न हो, इसके लिए उन्होंने Paytm Soundbox की व्यवस्था भी की। इस तरह शख्स ने नौकरी तलाशने के बजाय अपना छोटा कारोबार शुरू कर दिया।
30 रुपये की एक प्लेट, चार दिन में बिकीं 441 प्लेटें
बिजनेस की शुरुआत 30 रुपये प्रति प्लेट चोले-भटूरे बेचने से हुई। पहले दिन ही बिक्री ने उम्मीद जगाई। शख्स ने पहले दिन 73 प्लेटें बेचीं। दूसरे दिन यह आंकड़ा बढ़कर 101 प्लेट हो गया। तीसरे दिन उसने 120 प्लेटें बेचीं, जबकि चौथे दिन बिक्री ने एक और छलांग लगाई और कुल 147 प्लेटें बिक गईं। इस तरह सिर्फ चार दिनों में कुल 441 प्लेट चोले-भटूरे बिके। ₹30 प्रति प्लेट की कीमत के हिसाब से चार दिनों की कुल बिक्री 13,230 रुपये रही।
2700 रुपये खर्च के बाद 10530 रुपये का ग्रॉस प्रॉफिट
अंकित पांडे के मुताबिक, चार दिनों के दौरान कच्चे माल पर करीब 2700 रुपये का खर्च आया। कुल बिक्री 13230 रुपये रही। इस हिसाब से कच्चे माल की लागत घटाने के बाद करीब 10530 रुपये का ग्रॉस प्रॉफिट हुआ। हालांकि यह चार दिनों का आंकड़ा है और इसमें अन्य संभावित खर्च शामिल नहीं हैं, फिर भी शुरुआती बिक्री ने इस छोटे कारोबार की संभावनाओं को जरूर दिखा दिया है।
महीने में 70 रुपये हजार तक कमाई का अनुमान
अंकित ने यह भी अनुमान लगाया कि अगर बिक्री इसी रफ्तार से लगातार बनी रहती है, तो यह कारोबार हर महीने करीब 68000 से 70000 तक की कमाई कर सकता है। सालभर बिक्री स्थिर रहने पर कमाई 8 लाख रुपये से ज्यादा तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। बेशक, किसी भी छोटे कारोबार में बिक्री रोज एक जैसी रहे, यह जरूरी नहीं है। जगह, ग्राहकों की संख्या, कच्चे माल की कीमत और दूसरे खर्चों का असर कमाई पर पड़ सकता है। लेकिन शुरुआती चार दिनों के आंकड़ों ने यह जरूर दिखाया कि सही जगह और सही उत्पाद के साथ छोटा कारोबार भी अच्छी शुरुआत कर सकता है।
‘कई बार लोगों को नौकरी नहीं, अवसर की जरूरत होती है’
अंकित पांडे ने अपनी पोस्ट के अंत में एक ऐसी बात लिखी, जिसने इस कहानी को और खास बना दिया। उनका कहना था कि “कभी-कभी लोगों को नौकरी की जरूरत नहीं होती। उन्हें अपना कुछ बनाने का अवसर चाहिए होता है।” सोशल मीडिया पर भी उनकी इस सोच की चर्चा हो रही है। लोगों का कहना है कि रोजगार को सिर्फ नौकरी तक सीमित करके नहीं देखना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति में काम करने की इच्छा और क्षमता है, तो थोड़ी सी आर्थिक मदद, सही मार्गदर्शन और एक अवसर उसे आत्मनिर्भर बनने में मदद कर सकता है।
चोले-भटूरे के इस छोटे से स्टॉल की कहानी भी यही बताती है कि कारोबार शुरू करने के लिए हमेशा बड़ी पूंजी की जरूरत नहीं होती। कई बार 10000 रुपये की छोटी शुरुआत, मेहनत और सही अवसर किसी की कमाई का पूरा रास्ता बदल सकते हैं।
डिस्क्लेमर: इस कहानी में किए गए सभी दावे और विचार संबंधित व्यक्ति के निजी अनुभव हैं। ‘लाइव हिंदुस्तान’ वेबसाइट सोशल मीडिया पोस्ट पर किए गए इन दावों की पुष्टि नहीं करती है।
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