भारत के कई राज्यों में ड्रग्स की कहानी पुरानी है, लेकिन हर बार नई शक्ल ले लेती है. पहले सांप का जहर, सिलोचन, चरस और गांजा कम था, जो अब जॉम्बी ड्रग आ गया है. यह 2 घंटे में इंसान को पुतला बना देता है और पहुंचा देता है मौत के दरवाजे तक. इसका ताजा मामला चंडीगढ़ में देखा गया. इस ड्रग की खोज अमेरिका में हुई थी, जिसका असर भारत में भी वायरल हो गया है. नशे की नई बूटी जॉम्बी ड्रग कितना खतरनाक है? क्या ये भारत पहुंच गया है? ड्रग्स की भरमार में नया ‘जॉम्बी’ क्यों? आइए समझते हैं एक्सप्लेनर में…
सवाल 1: जॉम्बी ड्रग कितना अलग है और भारत में इसकी चर्चा क्यों?
जवाब: जॉम्बी ड्रग कोई नया केमिकल नहीं, बल्कि पशुओं की दवा में इस्तेमाल होने वाले जायलाजीन (Xylazine) को बहुत पावरफुल ऑपियोइड फेंटानिल (Fentanyl) के साथ मिलाकर बनाया गया मिश्रण है. जायलाजीन असल में घोड़ों और गायों को शांत करने के लिए इस्तेमाल होती है, लेकिन सड़क पर इसे ड्रग्स में मिलाकर बेचा जाता है ताकि नशा ज्यादा लंबा चले. अमेरिका में इसे ‘ट्रैंक’ या ‘ट्रैंक डोप’ कहते हैं.
मार्च 2026 में चंडीगढ़ के सेक्टर 33B में ब्लिंकिट डिलीवरी बॉय का वीडियो वायरल हुआ था. उसके मुंह में बीड़ी फंसी थी और आंखें खुली हुई थीं, लेकिन वह 2 घंटे तक बिल्कुल सीधा खड़ा रहा. लोगों ने घबराकर पुलिस को बुला लिया और सोशल मीडिया पर ट्रेंड हो गया #ZombieDrug.
सवाल 2: जॉम्बी ड्रग शरीर पर कैसे असर करता है?
जवाब: जायलाजीन दिमाग के नॉरेपिनेफ्रिन केमिकल को दबा देती है. जब इसे इंजेक्शन या सीधे तौर पर लिया जाता है, तो:
- सांस धीमी हो जाती है, दिल की धड़कन कम हो जाती है और मसल्स पूरी तरह ढीले पड़ जाते हैं.
- व्यक्ति घंटों तक ‘फ्रीज’ होकर खड़ा या बैठा रह जाता है, यानी आंखें खुली, लेकिन कोई रिएक्शन नहीं.
- लंबे इस्तेमाल से त्वचा सड़ने (skin rotting) लगती है, घाव भी बन जाते हैं.
- ओवरडोज होने से सांस बंद होकर मौत भी हो सकती है.
- ओवरडोज की दवा नेलोग्जोन (naloxone) भी इस पर पूरा असर नहीं करती.
यही लक्षण चंडीगढ़ में डिलीवरी बॉय पर दिखे थे.
सवाल 3: तो क्या जॉम्बी ड्रग भारत में पहुंच गया है?
जवाब: भारत में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं कि ये फैला है, लेकिन चंडीगढ़ वीडियो देखकर लोग इसे इसी से जोड़ रहे हैं. चंडीगढ़ वाला केस अभी तक अकेला वायरल केस है. कोई बड़ा आउटब्रेक या लैब कन्फर्मेशन नहीं हुआ है. पंजाब में ऑपियोइड्स की समस्या पुरानी है.
2025 में ANTF पंजाब ने 69 केस में 119 किलो हेरोइन जब्त की. MHA डेटा के मुताबिक 2025 में पंजाब में NDPS के तहत हजारों केस दर्ज हुए, लेकिन जायलाजीन का मिश्रण अभी तक रिपोर्ट नहीं हुआ. एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि अगर पाकिस्तान बॉर्डर से स्मगलिंग रूट्स से आया तो पंजाब-चंडीगढ़ पहले प्रभावित होंगे.

सवाल 4: दुनियाभर में ड्रग्स की कितनी कैटेगरी हैं और कैसे असर करती हैं?
जवाब: ड्रग्स की समस्या दशकों पुरानी है और समय के साथ उसकी कैटेगरी बदलती रही है. बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाले ड्रग्स की बात करें तो:
- चरस और गांजा: ये सबसे पुरानी और आम कैटेगरी हैं, जो दशकों से चल रही हैं. ये हल्का नशा देते हैं, लेकिन लंबे समय तक इस्तेमाल से फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं. याददाश्त कमजोर होती है और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है. इन्हें अक्सर रोजमर्रा या सामाजिक नशे की तरह इस्तेमाल किया जाता रहा है.
- सिलोचन: पंजाब का अपना लोकल सेडेटिव मिश्रण है. इसमें अक्सर बेंजोडायजेपाइन जैसी शांत करने वाली दवाओं का कॉकटेल मिलाया जाता है. इसका असर तेज सुस्ती और गहरी नींद लाना है. ये सस्ता और आसानी से उपलब्ध होने के कारण युवाओं में तेजी से फैला.
- सांप का जहर: सबसे अजीब और खतरनाक कैटेगरी में से एक है, जो 2012 के आसपास रिपोर्ट हुआ. PubMed (2022) और इंडियन जर्नल ऑफ फॉरेंसिक मेडिसिन (IJFM) में कम से कम 13 केस दर्ज हैं, जो मुंबई, रांची, चंडीगढ़, बैंगलोर आदि इलाकों से आए. युवा सांप को केमिकल से इंजेक्ट करवाकर उसका जहर जीभ पर लगवाते या निगलते थे. इससे मूड में बदलाव, सुस्ती, हाई जैसा फील होता है और कभी-कभी मौत भी हो जाती है. जर्नल ऑफ इंडियन सोसायटी ऑफ टॉक्सिकोलॉजी (JIST) में छपी एक रिसर्च के मुताबिक, ये ड्रग रेव पार्टीज में नॉवेल्टी और एडवेंचर की तलाश में ट्रेंड बना है. भारत में ये ट्रेंड खासतौर पर देखा गया.

- फार्मास्यूटिकल ऑपियोइड्स और हेरोइन (चिट्टा/स्मैक): इसमें फार्मेसी से मिलने वाली ट्रामाडोल और कोडीन जैसी दवाओं का गलत इस्तेमाल और हेरोइन (ब्राउन शुगर/स्मैक) दोनों शामिल हैं. गोल्डन क्रीसेंट रूट से हेरोइन आता है. ये तेज नशा देते हैं लेकिन जल्दी लत लगती है और ओवरडोज से मौत का खतरा रहता है.
- इन्हेलेंट्स: गोंद, पेंट थिनर, सॉल्वेंट आदि सस्ते पदार्थ सांस में लेना. ये मुख्य रूप से बच्चों और किशोरों में ज्यादा देखे जाते हैं. इससे तुरंत नशा चढ़ता है, लेकिन दिमाग और फेफड़ों को स्थायी नुकसान पहुंचाते हैं.
इसमें एक और कैटेगरी जुड़ गई है- जॉम्बी. इसका कच्चा माल आसानी से मेडिकल स्टोर पर मिल जाता है, जिससे ज्यादा लंबा नशा बेच रहे हैं.
सवाल 5: पहले ये ड्रग्स कम थे क्या, जो अब नया जॉम्बी ड्रग आ गया?
जवाब: पंजाब ओपियोइड डिपेंडेंस सर्वे और AIIMS की रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंजाब में 30 लाख से ज्यादा लोग किसी न किसी ड्रग पर निर्भर हैं. अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रूट्स से हेरोइन लगातार आ रहा है. डीलर पुरानी ड्रग्स में नई मिक्सिंग कर रहे हैं, ताकि नशा ज्यादा लंबा और सस्ता लगे.
सांप का जहर निचले स्तर का ट्रेंड था, सिलोचन लोकल स्तर का, चरस-गांजा रोजमर्रा का, जबकि फार्मा ऑपियोइड्स और हेरोइन बड़े पैमाने पर समस्या बनी हुई है. जॉम्बी ड्रग इसलिए चर्चा में आया क्योंकि जायलाजीन बहुत सस्ती और उपलब्ध है.

पंजाब सरकार अब अप्रैल 2026 से पहला व्यापक ड्रग एंड सोशियो-इकोनॉमिक सेंसर शुरू कर रही है, जिसमें 28,000 कर्मचारी 65 लाख परिवारों का सर्वे करेंगे. इसका मकसद सिर्फ नशे की संख्या जानना नहीं, बल्कि प्रभावित लोगों की आय, शिक्षा और सामाजिक स्थिति समझकर टारगेटेड रिहैबिलिटेशन पर फोकस करना है.
पुरानी ड्रग्स कम नहीं पड़ीं, बल्कि समस्या और जटिल होती जा रही है. युवाओं में बेरोजगारी, मानसिक तनाव और बॉर्डर रूट्स की वजह से नई-नई मिक्सिंग आ रही हैं. जॉम्बी ड्रग इसी का नया रूप है, जो न सिर्फ नशा देता है, बल्कि दिखने में भी डरावना बनाता है.
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