ईरान जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर घूम फिर कर टेरिफ पर आ गए हैं। इस बार ट्रंप ने 100% तक भारी भरकम टेरिफ लगाने का आदेश दिया है। ट्रंप ने अपनी पॉलिसी में बड़ा फेरबदल करते हुए विदेशी ब्रांडेड दवाओं पर 100% तक टेरिफ ठोकने की बात कही है। ट्रंप के इस फैसले का सीधा असर उन फार्मा कंपनियों पर पड़ेगा जो कंपनी दवाइयां अमेरिका के बाहर बनाती हैं। इस आदेश के साथ ही ट्रंप ने साफ कर दिया है कि इन दवा कंपनियों को ना सिर्फ अपनी कीमतें कम करनी होंगी बल्कि उनका उत्पादन भी अमेरिका के अंदर ही करना होगा।
इसे भी पढ़ें: NSA डोभाल से मिले रूसी अधिकारी, क्या हुई बात?
नए नियमों के मुताबिक जो कंपनियां आंशिक रूप से अपना उत्पादन अमेरिका शिफ्ट कर देंगी उन्हें 20% टैक्स देना होगा। वहीं आदेश का पालन ना करने वाली कंपनियों से 100% टेरिफ वसूला जाएगा। ट्रंप का दावा है कि इस फैसले से ना सिर्फ दवाइयां सस्ती होंगी बल्कि देश में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नौकरियों के अवसर भी पैदा होंगे। इतना ही नहीं ट्रंप ने स्टील, एलुमिनियम और तांबे जैसे मेटल उत्पादन के नियमों में भी बड़ा बदलाव किया है। जिसमें कई सामानों पर टेरिफ घटा दिया गया और टैक्स वसूलने के नियमों में भी बदलाव किया गया। ट्रंप प्रशासन ने 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 232 के तहत स्टील, एलुमिनियम और तांबे के आयात पर 50% शुल्क बरकरार रखा है। वहीं कुछ मेटल्स पर टेरिफ 25% कर दिया गया। इसके अलावा जिन उत्पादों में मेटल की मात्रा 15% से कम है, उन्हें टैक्स से पूरी तरह से छूट दी गई है। हालांकि इसके टैक्स वसूलने के तरीके में थोड़ा बदलाव जरूर हुआ है। अब यह शुल्क आयातित वस्तु के उस मूल्य पर लगेगा जो अमेरिकी ग्राहक भुगतान करते हैं। ना कि केवल धातु की मात्रा पर। अब यह समझिए कि ट्रंप के 100% टेरिफ के पीछे की वजह क्या है? दरअसल एक साल पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मुक्ति दिवस के नाम पर एक खास कानून आईईपीए यानी इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट के तहत पूरी दुनिया पर भारीभरकम टैक्स लगा चुके थे। जिससे दुनिया के कई देश भड़क गए और मामला कोर्ट तक पहुंच गया। जिसके बाद इस साल फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उन पुराने टैक्सों को अवैध और गैरकानूनी करार दिया। जिसका असर यह हुआ कि ट्रंप सरकार को 166 अरब डॉलर उन लोगों को वापस करने पड़ रहे हैं जिनसे यह टैक्स वसूला गया था। अब ट्रंप इसी भारीभरकम नुकसान की भरपाई करने और अपनी बात ऊपर रखने के लिए यह नियम लेकर आए हैं।
इसे भी पढ़ें: US में गिर रहे हैं बड़े-बड़े विकेट, आर्मी चीफ को हटाया, अब अगला नंबर काश पटेल-तुलसी गबार्ड का आया?
इस कदम का भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
घोषणा में स्पष्ट किए गए अनुसार, जेनेरिक दवाओं को छूट मिलने से भारत को काफी फायदा होगा। जेनेरिक दवाओं के वैश्विक बाज़ार में भारतीय कंपनियों का दबदबा है। इसलिए, अल्पावधि में जेनेरिक दवाओं को छूट मिलने से एक सुरक्षा कवच मिलेगा और कम लागत वाली दवाओं के निर्यात में आसानी होगी, जो अमेरिका के साथ भारत के दवा व्यापार की रीढ़ हैं। व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने समाचार एजेंसी को बताया,जेनेरिक दवाएं, जो भारतीय फार्मा निर्यात का अधिकांश हिस्सा हैं, टैरिफ से मुक्त हैं, लेकिन वाणिज्य विभाग जेनेरिक दवाओं की रीशॉर्डिंग की स्थिति का मूल्यांकन करेगा और तदनुसार टैरिफ का पुनर्मूल्यांकन करेगा।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.