बांग्लादेश में संसदीय चुनाव के परिणाम के बाद जो एक नाम सुर्खियों में है, वह है तारिक रहमान का. जिनके नेतृत्व में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने चुनाव में बंपर जीत दर्ज की है. माना जा रहा है कि वह 14 फरवरी (शनिवार) को प्रधानमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को जीत की बधाई दी है. तारिक रहमान केवल उत्तराधिकारी भर नहीं हैं, मौजूदा दौर में देश के सबसे शक्तिशाली नेता के तौर उभरे हैं. रहमान को ‘डार्क प्रिंस’ के नाम से भी जाना जाता है. आइए जानते हैं उनकी 5 बड़ी ताकतों के बारे में.
राजनीतिक रसूख के दबाव से उभरे
तारिक रहमान बांग्लादेश के राष्ट्रपति जिया उर रहमान और पहली महिला प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बड़े बेटे हैं. 1967 में जन्मे रहमान की राजनीतिक पहचान खास तौर से उनके परिवार के राजनीतिक रसूख को लेकर होती है. सत्ता के बोझ तले जन्म लेने के बाद भी उन्होंने अपनी पारिवारिक विरासत को बखूबी संभाला. उन्होंने अपने राजनीतिक उदय को पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह सुनिश्चित किया. शुरुआती दौर में ही वह बीएनपी और अवामी लीग के बीच के केंद्र में नजर आना शुरू हो गए.
पर्दे के पीछे से संभाली कमान
खालिदा जिया जब 2001 से 2006 तक बांग्लादेश में दूसरी बार प्रधानमंत्री रहीं तब एक प्रमुख संगठनात्मक रणनीतिकार के तौर पर तारिक रहमान ने पर्दे के पीछे से बखूबी मोर्चा संभाला. हालांकि इस दौरान उन्होंने कोई औपचारिक तौर पर कोई सरकारी पद नहीं संभाला, फिर भी उन्हें पार्टी के सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में से एक माना जाता था. पार्टी पर पकड़ मजबूत करने के बाद वह बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष बन गए. विदेश में रहते हुए भी पार्टी पर उन्होंने कंट्रोल बनाए रखा.
देश छोड़ने के बाद भी पार्टी पर बनाए रखी पकड़
2008 में जब आम चुनाव हुए और अवामी लीग की जीत के साथ शेख हसीना प्रधानमंत्री बनीं तो रहमान ने व्यक्तिगत सुरक्षा और बीएनपी द्वारा प्रायोजित राजनीतिक उत्पीड़न के आरोपों का हवाला देते हुए बांग्लादेश छोड़ दिया और लंदन में बस गए. विदेश में रहने के बाद भी पार्टी पर कंट्रोल बनाए रखा और पार्टी की रणनीति का निर्देशन करते रहे.
संसद का सदस्य रहे बिना संभाली पार्टी
बीएनपी प्रमुख इससे पहले बांग्लादेश की संसद के सदस्य रूप में नहीं रहे. उन्होंने चुनावी पद संभालने की बजाय पार्टी पर नियंत्रण, संगठन को मजबूत बनाने पर फोकस किया. 17 साल बाद वह बांग्लादेश वापस लौटे और अवामी लीग की गैर मौजूदगी में प्रधानमंत्री पद की रेस के लिए मजबूत दावेदार के तौर पर उभरे
भ्रष्टाचार के आरोप का मजबूती से सामना
अवामी लीग के शासनकाल में तारिक रहमान पर करप्शन से लेकर मनी लॉन्ड्रिंग तक कई गंभीर आरोप लगे. बांग्लादेशी कोर्ट ने कई मामलों में अनुपस्थिति के चलते उनको दोषी भी ठहराया लेकिन तारिक ने इनका सामना किया. उनके समर्थक इन आरोपों को राजनीतिक से प्रेरित मानते हैं.
दो सीटों से चुनाव लड़े, दोनों जगह से जीते
तारिक रहमान इस बार दो सीटों से चुनावी मैदान में उतरे थे और दोनों जगहों से जीत दर्ज की. उन्होंने ढाका-17 और बोगरा-6 सीट से परचम लहराया.
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