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जम्मू कश्मीर में आतंक का पोस्टर बॉय सैफुल्लाह आखिर मारा गया. जैश-ए-मोहम्मद का खूंखार कमांडर, हाफिज सईद का करीबी सैफुल्लाह कश्मीर में बीते दिनों हुए हर टेरर अटैक में शामिल था. आखिर सेना और जम्मू कश्मीर पुलिस ने मिलकर उसे और उसके दो साथियों को मौत के घाट उतार दिया.
सैफुल्लाह कश्मीर में हुए अटैक का मास्टरमाइंड था.
सूत्रों के अनुसार, सैफुल्लाह कई आतंकी हमलों की साजिश और उन्हें अंजाम देने में शामिल रहा था. उस पर OGW (ओवर ग्राउंड वर्कर्स) का नेटवर्क बढ़ाने और युवाओं की भर्ती में सक्रिय भूमिका निभाने के आरोप थे. जांच एजेंसियों के मुताबिक, वह लगातार पाकिस्तान स्थित आकाओं के संपर्क में था और सीमा पार से निर्देश ले रहा था. खुफिया जानकारी के अनुसार, हाल ही में मारे गए अपने साथी आदिल के बाद सैफुल्लाह किश्तवाड़ से कश्मीर की ओर शिफ्ट होने की फिराक में था, लेकिन सुरक्षाबलों ने उसकी इस साजिश को नाकाम कर दिया. बताया जा रहा है कि हालिया ऑपरेशनों में मारे गए सातों आतंकी आपस में संपर्क में थे और एक संगठित मॉड्यूल के तहत काम कर रहे थे. सैफुल्लाह के मारे जाने से जैश नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है. सुरक्षा एजेंसियां अब उसके सहयोगियों और पूरे मॉड्यूल की कड़ियों को खंगालने में जुटी हैं.
सैफुल्लाह के काले कारनामे?
सैफुल्लाह सिर्फ बंदूक उठाने वाला एक आम आतंकी नहीं था, बल्कि वह जैश-ए-मोहम्मद का एक रणनीतिकार था. उसकी मौत भारतीय सुरक्षा बलों के लिए बहुत बड़ी कामयाबी है. सैफुल्लाह का सबसे खतरनाक काम था घाटी में OGWs ओवर ग्राउंड वर्कर की संख्या बढ़ाना. OGW वो लोग होते हैं जो देखने में आम नागरिक लगते हैं, लेकिन असल में वे आतंकियों को पनाह, पैसा, हथियार और खुफिया जानकारी मुहैया कराते हैं. सैफुल्लाह ने स्थानीय युवाओं का ब्रेनवॉश करके एक बड़ा स्लीपर सेल नेटवर्क तैयार कर लिया था. खुफिया एजेंसियों की जांच में साफ हुआ है कि सैफुल्लाह 24 घंटे पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के सीधे संपर्क में था. वह वहीं से निर्देश लेता था और यहां टारगेट किलिंग या हमलों की प्लानिंग करता था. पिछले कुछ समय में सुरक्षा बलों के काफिलों पर घात लगाकर हमले करने या स्थानीय लोगों में खौफ पैदा करने की जितनी भी साजिशें रची गईं, उनके पीछे इसी सैफुल्लाह का शातिर दिमाग था.
खौफ में था सैफुल्लाह, भागते-भागते मारा गया
आतंकियों की सबसे बड़ी कमजोरी उनका खौफ होता है. सैफुल्लाह के साथ भी यही हुआ. किश्तवाड़ इलाके में 10 दिन पहले सुरक्षा बलों ने एक बड़े एनकाउंटर में जैश के एक और खूंखार आतंकी आदिल को मार गिराया था. आदिल असल में सैफुल्लाह का राइट-हैंड था. आदिल की मौत के बाद सैफुल्लाह को समझ आ गया था कि भारतीय सेना की गोलियों पर अगला नाम उसी का लिखा है.
सुरक्षा एजेंसियों के रडार से बचने के लिए सैफुल्लाह ने किश्तवाड़ के जंगलों से भागकर कश्मीर घाटी में घुसपैठ करने का मास्टरप्लान बनाया था. वह घाटी में जाकर किसी बड़ी वारदात को अंजाम देकर अपनी साख बचाना चाहता था. लेकिन, भारतीय खुफिया एजेंसियां उससे चार कदम आगे थीं. उसके कश्मीर पहुंचने से पहले ही सुरक्षा बलों ने उसे किश्तवाड़ में ही घेर लिया और गोलियों से छलनी कर दिया.
सैफुल्लाह के बारे में 5 खास इनपुट
- सैफुल्लाह ने VDG समेत दो पुलिसकर्मियों और तीन भारतीय सेना के जवानों को अलग अलग मुठभेड़ में शहीद किया.
- सैफुल्लाह ने जगह बदलने, रहने, खाने पीने तक से लेकर हर जरूरत की चीजों के लिए अब तक 32 से ज्यादा स्थानीय लोगों से मदद ली.
- सैफुल्लाह ने 6 अलग अलग सिम मोबाइल रखें थे, जिससे वह पाकिस्तान में डायरेक्ट संपर्क में था, संपर्क करने के बाद फोन और सिम फेंक अपनी अलगी जगह पर चला जाता था.
- सैफुल्लाह ने कश्मीरी भाषा सीख ली थी और हाइडआउट में हथियार छिपा कर आम इंसान बन कर रेकी भी की.
- सैफुल्लाह ने घुसपैठ करवाने का पूरा इंतजाम करवा कर कश्मीर भागने की भी तैयारी कर ली थी, लेकिन बीच में ही सेना के हत्थे चढ़ गया.
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Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें
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