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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ईरान की न्यूक्लियर महत्वाकांक्षाओं को रोकने का तरीका बताया है। शुरुआत में ही इजराइल और अमेरिका ने ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को मार गिराया जो ईरान की राजनीति का सबसे बड़ा झटका था। खामेनेई के जाने के बाद ईरान ने जवाबी हमले शुरू कर दिए जिसमें इजराइल और अमेरिकी ठिकानों और यहां तक कि खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शामिल हैं। 9 मार्च 2026 तक यह युद्ध अपने 10वें दिन में पहुंच चुका है और अमेरिका और इजराइल ने ईरान के तेल डिपो मिसाइल साइट्स आईआरजीसी यानी कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड स्कोप्स के हेड क्वार्टर्स और न्यूक्लियर साइट्स पर दनादन हमले किए हैं। ईरान ने बदले में इजराइल पर मिसाइल बरसाए जिनमें क्लस्टर म्यूनिशियंस भी शामिल हैं और इस बीच अमेरिकी सैनिकों की मौत भी हो चुकी है। कम से कम सात अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं। इस युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ब्रैंड क्रूड $ प्रति बैरल से ऊपर पहुंच चुका है।
इतना ही नहीं कुछ रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि 20% की बढ़ोतरी भी हुई है। स्टेट ऑफ ऑर्बुज जो दुनिया के 20% तेल का रास्ता है लगभग पूरी तरह से बंद हो चुका है। जहाजों की आवाजाही 30% से ज्यादा कम हो चुकी है। ईरान ने एनर्जी वॉर की धमकी दे दी है और अमेरिका ने बिना शर्त सरेंडर की मांग की है ईरान से। इतना ही नहीं इजराइल ने ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामनेई यानी जो अली खामनेई के बेटे हैं उनको भी निशाना बनाने की धमकी दे दी है और यह युद्ध अब लेबनान इराक सीरिया तक फैल चुका है जहां हिजबुल्लाह और अन्य ग्रुप्स शामिल हो सकते हैं। अब इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। स्टॉक मार्केट्स गिर रहे हैं।
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भारत के लिए तो भारत के लिए भी चिंता का विषय है। बहुत बड़ा चिंता का विषय है क्योंकि भारत का 55 से 60% तेल इंपोर्ट गल्फ से ही आता है। इराक, सऊदी अरब, यूएई, कुवैत से आता है। लेकिन इस युद्ध में भारत की भूमिका एक एक दोस्त की तरह है जो संकट में मदद करता है और मदद कर भी रहा है। एक तरफ ईरान की मदद, दूसरी ओर मिडिल ईस्ट के देशों की मदद। अब आते हैं मुख्य मुद्दे पर। मिडिल ईस्ट में फूड सिक्योरिटी का संकट है। जहां पूरी दुनिया को तेल की समस्या दिख रही है, वहीं मिडिल ईस्ट के देशों पर फूड सिक्योरिटी का बादल मंडरा रहा है। यूएई हो या सऊदी अरब इन सभी देशों में 90% से ज्यादा खाने-पीने का सामान बाहर से इंपोर्ट होता है। यानी बाहर से उनके यहां सामान जाता है।
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वह कुछ उगाते नहीं है। रेगिस्तान होने की वजह से पानी की कमी है और कृषि सीमित है। सामान्य समय में यह देश यूरोप, एशिया और अमेरिका से फल, सब्जियां, अनाज इंपोर्ट करते हैं। लेकिन इस युद्ध ने सब कुछ बदल दिया। स्टेट ऑफ हॉर्मोज बंद होने से जहाज नहीं जा पा रहे। ऐसा कहा जा रहा है। उड़ाने प्रभावित हैं। कई पैसेंजर फ्लाइट रद्द हो चुकी है और कारगो भी अब बहुत कम लोग जानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय पैसेंजर विमानों के कारगो होल्ड की बड़ी मात्रा में ताजा फल जाता है।
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