मौजूद जानकारी के अनुसार, एजेंसी के प्रमुख फातिह बिरोल ने ऑस्ट्रेलिया की राजधानी में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि मौजूदा हालात एक साथ कई संकटों का मिश्रण बन चुके हैं। उन्होंने इसे तेल और गैस आपूर्ति में अभूतपूर्व व्यवधान बताते हुए कहा कि यह स्थिति 1970 के दशक के तेल संकट और रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद बने हालात से भी ज्यादा जटिल नजर आ रही है।
गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब चौथे सप्ताह में पहुंच चुका है और इस दौरान ऊर्जा ढांचे को भारी नुकसान हुआ है। मौजूद जानकारी के अनुसार, क्षेत्र के कम से कम नौ देशों में करीब 40 ऊर्जा परिसंपत्तियां गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं, जिससे आपूर्ति व्यवस्था पर सीधा असर पड़ा है।
बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का एक अहम मार्ग है, लगभग बंद होने की स्थिति में पहुंच गया है। यह वही रास्ता है जहां से दुनिया की करीब पांचवां हिस्सा ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है। ऐसे में इसका बाधित होना वैश्विक बाजार के लिए बड़ा झटका साबित हो रहा है।
इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। मौजूद जानकारी के अनुसार, अमेरिका ने ईरान को 48 घंटे के भीतर जलडमरूमध्य खोलने का अल्टीमेटम दिया है और चेतावनी दी है कि ऐसा न होने पर ऊर्जा ढांचे पर सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। वहीं ईरान ने भी साफ कर दिया है कि अगर उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला हुआ तो वह व्यापक जवाबी कार्रवाई करेगा।
गौरतलब है कि इस पूरे घटनाक्रम का असर एशियाई देशों पर ज्यादा पड़ता दिख रहा है, जहां ईंधन की कमी की आशंका बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो यह संकट वैश्विक महंगाई और आर्थिक सुस्ती को और बढ़ा सकता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, हालात को संभालने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। ऊर्जा एजेंसी ने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर आपातकालीन भंडार से तेल जारी किया जा सकता है, हालांकि इसके लिए कोई तय कीमत सीमा निर्धारित नहीं की गई है।
बता दें कि हाल ही में एजेंसी के सदस्य देशों ने मिलकर बाजार में आपूर्ति बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर तेल जारी करने का फैसला लिया था। इसके बावजूद बाजार में अस्थिरता बनी हुई है और कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया का यह संकट अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस पर वैश्विक सहयोग और कूटनीतिक समाधान ही स्थिति को सामान्य कर सकते हैं।
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