कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सोमवार को पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए राजनयिक समाधान की मांग की। मीडिया से बात करते हुए, कांग्रेस सांसद ने ऊर्जा की खपत करने वाले देशों के लिए उत्पन्न कठिनाइयों पर जोर दिया और कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, उर्वरक, खाद्य पदार्थ और दवाओं पर आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के प्रभावों का हवाला दिया।
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उन्होंने कहा कि संघर्ष शायद अपने सबसे खतरनाक दौर में प्रवेश कर चुका है। ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी में 3000 जहाज निष्क्रिय पड़े हैं। सभी को तनाव कम करने और कूटनीति को मौका देने की जरूरत है। ऊर्जा खपत करने वाले देशों के लिए स्थिति हर पल और भी गंभीर होती जा रही है, क्योंकि यह केवल कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का मामला नहीं है, बल्कि उर्वरक, खाद्य पदार्थ और जीवन रक्षक दवाओं जैसे आवश्यक औषधियों का भी है। पूरी आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो गई है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तीन सप्ताह की शत्रुता के बाद हम इस संघर्ष के एक संवेदनशील दौर में प्रवेश कर चुके हैं।
रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया संघर्ष के संदर्भ में चल रहे और प्रस्तावित शमन उपायों पर चर्चा करने के लिए कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की बैठक की अध्यक्षता की। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, कैबिनेट सचिव ने वैश्विक स्थिति और भारत सरकार के सभी संबंधित मंत्रालयों/विभागों द्वारा संघर्ष के संबंध में अब तक उठाए गए और योजनाबद्ध उपायों पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
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कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, बिजली, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई), निर्यातकों, जहाजरानी, व्यापार, वित्त, आपूर्ति श्रृंखला और सभी प्रभावित क्षेत्रों पर अपेक्षित प्रभाव और उससे निपटने के लिए उठाए गए उपायों पर चर्चा की गई। देश के समग्र व्यापक आर्थिक परिदृश्य और आगे उठाए जाने वाले उपायों पर भी चर्चा हुई। आम आदमी की महत्वपूर्ण आवश्यकताओं, जिनमें खाद्य, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा शामिल हैं, की उपलब्धता का विस्तृत आकलन किया गया। अल्पकालिक, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक दृष्टिकोण पर भी विचार किया गया।
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