विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) ने बुधवार को कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच इस साल वैश्विक व्यापार वृद्धि दर धीमी होकर 1.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
डब्ल्यूटीओ के अर्थशास्त्रियों ने आगाह किया है कि यदि ऊर्जा की कीमतें उच्च स्तर पर बनी रहती हैं, तो पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से व्यापार वृद्धि में और गिरावट आ सकती है।
इसके साथ ही, यात्रा और परिवहन में आने वाली बाधाओं के कारण खाद्य आपूर्ति और सेवाओं के व्यापार पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है।
डब्ल्यूटीओ की वैश्विक व्यापार परिदृश्य और सांख्यिकी’ रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक वस्तु व्यापार की वृद्धि दर वर्ष 2025 के 4.6 प्रतिशत से घटकर 2026 में 1.9 प्रतिशत रह जाएगी। एआई से संबंधित उत्पादों की मांग में उछाल और नए शुल्कों से बचने के लिए आयात में आई तेजी के बाद अब व्यापार के सामान्य होने की उम्मीद है।
यह पूर्वानुमान भारत के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं, क्योंकि देश अपने निर्यात को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
डब्ल्यूटीओ की महानिदेशक नगोजी ओकोन्जो इवेला ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण इस आधारभूत पूर्वानुमान पर दबाव बना हुआ है।
उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा की कीमतों में निरंतर वृद्धि वैश्विक व्यापार के लिए जोखिम बढ़ा सकती है, जिसका संभावित असर खाद्य सुरक्षा पर पड़ सकता है और उपभोक्ताओं व व्यवसायों पर लागत का दबाव बढ़ सकता है।
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