आज विजयपत सिंघानिया का होगा अंतिम संस्कार
परिवार के अनुसार, आज (29 मार्च) को विजयपत सिंघानिया को अंतिम श्रद्धांजलि दोपहर 1.30 बजे मुंबई के हवेली, एलडी रुपारेल मार्ग पर आयोजित की जाएगी। इसके बाद उनका अंतिम संस्कार चंदनवाड़ी श्मशान घाट में दोपहर 3.00 बजे होगा।
विजयपत 1980 से 2000 तक रेमंड ग्रुप के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर रहे। उन्होंने 2015 में अपने बेटे को कंपनी की बागडोर सौंपी थी।
कंपनी को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाया
विजयपत सिंघानिया का जन्म 4 अक्टूबर 1938 को हुआ था। वे सिंघानिया परिवार से थे, जिसने 1944 में ई.डी. सासून एंड कंपनी से एक छोटी टेक्सटाइल मिल खरीदकर रेमंड की नींव रखी। उनके पिता एल.के. सिंघानिया ने शुरुआत में कंपनी संभाली थी। 1980 में अपने चचेरे भाई जी.के. सिंघानिया की मृत्यु के बाद विजयपत रेमंड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर बने।
उन्होंने 1980 से 2000 तक कंपनी का नेतृत्व किया और इसे एक छोटी मिल से भारत की सबसे बड़ी सूट और टेक्सटाइल कंपनी में तब्दील कर दिया। “द कंप्लीट मैन” और “Feels like heaven” जैसे प्रसिद्ध अभियान उनके नेतृत्व में ही चले। उन्होंने कंपनी को वैश्विक स्तर पर भी मजबूत बनाया और कपड़ा कारोबार में इसे नई पहचान दिलाई थी।
वे एक उत्कृष्ट एविएटर (विमान चालक) भी थे। 67 वर्ष की उम्र में हॉट एयर बैलून से सबसे ऊंची ऊंचाई का विश्व रिकॉर्ड बनाया। वे मुंबई के शेरिफ बने। साल 2006 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
जब बेटे संग हुआ था विवाद
2015 में उन्होंने अपनी 37% हिस्सेदारी (करीब 1000 करोड़ रुपये की तत्कालीन वैल्यू) अपने छोटे बेटे गौतम सिंघानिया को सौंप दी थी। इसके बाद पिता-पुत्र के बीच संपत्ति, घर और अन्य मुद्दों पर विवाद शुरू हुआ। विजयपत सिंघानिया ने आरोप लगाया कि बेटे ने उन्हें धोखा दिया, घर से बेदखल किया। एक समय वे भारत के सबसे अमीर उद्योगपतियों में शुमार थे, लेकिन बाद में वे दक्षिण मुंबई में किराए के मकान में रहने लगे। उन्होंने खुद कहा था कि अपने बेटे को सबकुछ देकर उन्होंने एक बड़ी गलती की है।
गौतम सिंघानिया के रास्ते अपनी पत्नी नवाज मोदी से अलग हो गए। तब विजयपत सिंघानिया ने अपनी बहू के साथ खड़े रहने की बात कही थी। हालांकि करीब दो साल पहले वे अपने बेटे के साथ फिर नजर आए थे।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.