आज (3 अप्रैल) हिन्दी पंचांग का दूसरा माह वैशाख शुरू हो गया है। इस महीने में गंगा, यमुना, शिप्रा, नर्मदा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने की और दान-पुण्य करने की परंपरा है। ये महीना 1 मई को बुद्ध पूर्णिमा के साथ खत्म होगा। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, वैशाख मास में गर्मी बढ़ जाती है, इसलिए इन दिनों में खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। गर्मी के समय में रहन-सहन में सतर्कता रखी जाती है तो मौसमी बीमारियों से हम बच सकते हैं। शास्त्रों में वैशाख मास के बारे में लिखा है कि- न माधवसमो मासो न कृतेन युगं समम्। न च वेदसमं शास्त्रं न तीर्थं गंङ्गया समम्।। इस श्लोक के अनुसार वैशाख के समान कोई अन्य मास नहीं है, सतयुग के समान कोई युग नहीं है। वेद के समान को शास्त्र नहीं है और गंगाजी के समान कोई तीर्थ नहीं है। वैशाख सबसे श्रेष्ठ महीना है। ये महीना बुद्ध पूर्णिमा के साथ खत्म होगा। यह मास माता की तरह सब जीवों की इच्छाओं को पूरा करने वाला है। ये महीना वृक्षों में कल्पवृक्ष के समान और शिव जी, विष्णु को प्रसन्न करने वाला है। वैशाख मास में ध्यान रखें ये बातें
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