होर्मुज में बड़ा सैन्य अभियान
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि उसके दो युद्धपोत (डेस्ट्रॉयर) होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश कर चुके हैं। यहां अमेरिकी सेना ने ‘माइन-क्लियरिंग’ अभियान शुरू किया है ताकि ईरान द्वारा बिछाई गई समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाया जा सके। एडमिरल ब्रैड कूपर के अनुसार, आने वाले दिनों में पानी के नीचे काम करने वाले आधुनिक ड्रोन भी इस अभियान का हिस्सा बनेंगे ताकि वैश्विक शिपिंग कंपनियों के लिए एक सुरक्षित समुद्री मार्ग तैयार किया जा सके।
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वार्ता की विफलता पर ट्रंप का कड़ा रुख
ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट के जरिए बताया कि इस्लामाबाद बैठक में अधिकतर बिंदुओं पर सहमति बन गई थी, लेकिन पेंच ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर फंसा। ट्रंप ने कहा, ‘ईरान ने परमाणु हथियार छोड़ने से इनकार कर दिया, जिस कारण वार्ता विफल हुई। अब समझौता हो या न हो, मेरे लिए होर्मुज को सुरक्षित करना और वहां से अवैध वसूली रोकना पहली प्राथमिकता है।’
ईरान पर विनाशकारी हमले की चेतावनी
ईरान पर वैश्विक उगाही का आरोप लगाते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरानी नौसेना, वायु सेना और रडार सिस्टम पहले ही तबाह हो चुके हैं। उन्होंने तीखी चेतावनी देते हुए कहा, ‘खामेनेई और उनके अधिकांश नेता मारे जा चुके हैं। अगर किसी भी ईरानी बल ने अमेरिकी जहाजों पर हमला किया, तो उसे नरक में भेज दिया जाएगा।’ ट्रंप ने दावा किया कि उनकी सेना ईरान के बचे-खुचे सैन्य बुनियादी ढांचे को भी खत्म करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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तेल आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर संकट
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की 20% तेल आपूर्ति का मुख्य मार्ग है। 28 फरवरी को हुए हमलों के बाद ईरान ने इस रास्ते को लगभग ठप कर दिया है। पहले यहां से रोजाना 100 से ज्यादा जहाज गुजरते थे, जो अब घटकर केवल एक दर्जन रह गए हैं। इस नाकाबंदी से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उतार-चढ़ाव की आशंका है।
ईरान का पलटवार
दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए कहा कि वे इस बातचीत में ‘गहरे अविश्वास’ के साथ शामिल हुए थे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका या इजरायल की ओर से फिर कोई हमला हुआ, तो ईरान उसका कड़ा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। फिलहाल, होर्मुज में अमेरिकी युद्धपोतों की मौजूदगी ने युद्ध के दोबारा शुरू होने के संकेत दे दिए हैं।
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