व्हाइट लाइट का सबसे बड़ा नुकसान आंखों पर पड़ता है. इस रोशनी में नीली किरणें यानी ब्लू लाइट ज्यादा मात्रा में होती हैं, जो आंखों को जल्दी थका देती हैं. लंबे समय तक व्हाइट लाइट में बैठकर काम करने से आंखों में जलन, सूखापन, सिरदर्द और धुंधला दिखने जैसी समस्याएं हो सकती हैं. बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह रोशनी और भी ज्यादा नुकसानदेह मानी जाती है. जो लोग देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप के साथ व्हाइट लाइट में रहते हैं, उन्हें आंखों की परेशानी जल्दी होने लगती है.
नींद पर भी व्हाइट लाइट का असर काफी गहरा होता है. विशेषज्ञों के अनुसार, सफेद तेज रोशनी मेलाटोनिन हार्मोन के स्राव को कम कर देती है. यही हार्मोन हमें नींद लाने में मदद करता है. रात में व्हाइट लाइट ऑन रखने से दिमाग को यह संकेत मिलता है कि अभी दिन है, जिससे नींद आने में दिक्कत होती है. इसका नतीजा यह होता है कि व्यक्ति देर तक जागता रहता है, नींद पूरी नहीं होती और सुबह थकान महसूस होती है. लंबे समय तक ऐसा होने से तनाव, चिड़चिड़ापन और फोकस की कमी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं.
मानसिक सेहत के लिहाज से भी व्हाइट लाइट को पूरी तरह सही नहीं माना जाता. बहुत तेज और ठंडी रोशनी दिमाग को लगातार एक्टिव मोड में रखती है. इससे बेचैनी, घबराहट और तनाव बढ़ सकता है. खासतौर पर बेडरूम, ड्राइंग रूम या पूजा स्थान में व्हाइट लाइट का इस्तेमाल माहौल को असहज बना सकता है. घर वह जगह होती है जहां मन को शांति मिलनी चाहिए, लेकिन गलत रोशनी उस सुकून को भी छीन सकती है.
व्हाइट लाइट की जगह आप वॉर्म लाइट या येलो लाइट का इस्तेमाल कर सकते हैं. येलो लाइट आंखों को आराम देती है और नींद के लिए ज्यादा अनुकूल मानी जाती है. यह रोशनी सूर्यास्त के बाद के प्राकृतिक वातावरण से मेल खाती है, जिससे शरीर को रिलैक्स होने का संकेत मिलता है. बेडरूम, लिविंग एरिया और
अगर आप चाहते हैं कि घर में रोशनी सेहत के लिए नुकसानदायक न हो, तो हर कमरे के हिसाब से सही लाइट चुनना जरूरी है. दिन में प्राकृतिक रोशनी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें और रात में आंखों को सुकून देने वाली वॉर्म लाइट अपनाएं. छोटे-से इस बदलाव से न सिर्फ आपकी आंखें और नींद बेहतर होंगी, बल्कि मानसिक शांति और लाइफस्टाइल में भी सकारात्मक फर्क महसूस होगा.
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