पतंग और डोर की कहानी
एक बार की बात है, एक खेत में एक रंग-बिरंगी पतंग आसमान में ऊंची उड़ान भर रही थी. बिना पंखों के भी वह चिड़ियों से मुकाबला कर रही थी. पतंग को अपनी ऊंचाई पर बहुत घमंड हो गया. उसने नीचे ज़मीन से बंधी अपनी डोर से कहा, “तुम मुझे बेकार में पकड़ रहे हो. अगर तुम मुझे छोड़ दोगे, तो मैं इस नीले आसमान को पार करके बादलों के ऊपर उड़ जाऊंगी.”
डोर ने धीरे से कहा, “दोस्त, यह मत भूलना कि मैं तुम्हें रोक नहीं रही, बल्कि थामे हुए हूं. मेरी वजह से ही तुम हवा के झोंकों को झेल पा रहे हो.”
लेकिन पतंग ने नहीं सुना. आखिर में, डोर टूट गई. पतंग को आज़ादी महसूस हुई. वह एक पल के लिए ऊंची उठी, लेकिन जैसे ही हवा का रुख बदला, वह डगमगाने लगी. बिना किसी सहारे के, पतंग धीरे-धीरे ज़मीन की ओर बहने लगी और आखिर में एक घने पेड़ के कांटों में फंस गई.
बिना पंख उड़ने वाली अन्य चीजें-
बादल (Clouds):
बादल भी बिना पंखों के मील का सफर तय करते हैं। उन्हें हवा का साथ मिलता है और वे पूरी दुनिया में शांति का संदेश फैलाते हैं.
कल्पना और विचार (Imagination):
इंसान के विचार बिना किसी पंख या पासपोर्ट के सात समंदर पार जा सकते हैं. एक लेखक या कवि अपने विचारों की उड़ान से हमें नए संसार की सैर करा देता है.
वक्त (Time):
अक्सर कहा जाता है कि “समय उड़ता है” (Time flies). यह बिना किसी शोर के और बिना पंखों के इतनी तेज़ी से गुज़र जाता है कि हमें पता भी नहीं चलता.
पहेली से हमें क्या सीख मिलती है?
पतंग की बिना पंखों वाली उड़ान हमें सिखाती है कि अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए सिर्फ़ पंखों की ही नहीं, बल्कि सही डोर (डिसिप्लिन और वैल्यूज़) की भी ज़रूरत होती है. जब तक हम अपने परिवार और वैल्यूज़ की डोर से जुड़े रहते हैं, हम आसमान की ऊँचाइयों तक पहुंच सकते हैं.
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Disclaimer : इस खबर में दी गई जानकारी और सलाह एक्सपर्ट्स से बातचीत पर आधारित है. यह सामान्य जानकारी है, पर्सनल सलाह नहीं. इसलिए किसी भी सलाह को अपनाने से पहले एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें. किसी भी नुकसान के लिए News-18 जिम्मेदार नहीं होगा.
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