Tips and Tricks: महंगे रसायनों को मात देने वाला आयुर्वेद का यह प्राचीन नुस्खा त्वचा के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार किचन की यह खास चीज मुंहासों और दाग-धब्बों को जड़ से मिटाकर कुदरती निखार लाती है. बिना किसी साइड इफेक्ट के सौंदर्य पाने का यह गुप्त राज अब दुनिया के सामने है.
आयुर्वेद में कस्तूरी हल्दी को त्वचा के लिए किसी भी आधुनिक कॉस्मेटिक से कहीं अधिक प्रभावी माना गया है. पतंजलि के अनुभवी आयुर्वेदाचार्य भुवनेश पांडे के अनुसार, यह मसाला त्वचा की रंगत निखारने और गहराई से पोषण देने में अद्वितीय है. इसके औषधीय गुण त्वचा संबंधी विकारों को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखते हैं.

कस्तूरी हल्दी का नियमित उपयोग न केवल मुंहासों और दाग-धब्बों को दूर करता है, बल्कि यह प्राकृतिक चमक भी प्रदान करता है. सौंदर्य प्रसाधनों के कृत्रिम रसायनों की तुलना में, यह आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी त्वचा को बिना किसी दुष्प्रभाव के स्वस्थ बनाती है, जिससे इसे ‘स्किन केयर’ के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है.

एंटी बैक्टेरियल, एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटी सेप्टिक और एंटीऑक्सिडेंट जैसे दर्जनों तत्वों से भरपूर यह हल्दी ज़मीन को खोदकर निकाली जाती है, जो मुख्य रूप से जंगली क्षेत्रों में ही उपजती है. यही कारण है कि इसे जंगली हल्दी के रूप में भी जाना जाता है और इसकी कई विशेषताएं हैं.
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यदि आपकी त्वचा कील मुंहासों से भरी है और आप त्वचा संबंधित समस्याओं से पीड़ित हैं, तो कस्तूरी मंजल का उपयोग कर सकते हैं. इतना ही नहीं, झुर्रियों, टैनिंग, अत्यधिक तेल और एजिंग जैसी समस्या से छुटकारे के लिए भी कस्तूरी हल्दी का उपयोग किया जा सकता है.

कस्तूरी मंजल को करकुमा एरोमैटिका नाम से भी जाना जाता है. यह जंगली हल्दी मुख्य रूप से जड़ है. ऐसा माना जाता है कि बाहरी प्रयोगों के लिए यह अन्य हल्दी की अन्य सभी किस्मों की तुलना में सर्वोत्तम है.

बकौल भुवनेश, इसके उपयोग के लिए सबसे पहले इसे धो लें और फिर पीस कर उसमें गुलाब जल की कुछ बूंदे मिला लें. इस प्रकार पेस्ट को तैयार कर उसे नियमित रूप से हर रात प्रभावित त्वचा पर लगाएं. सप्ताह दिन तक ऐसा करने से आप अपनी आंखों से जादुई असर को देख सकते हैं.
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