टूटा पौधा मरता नहीं, संभलता है
अक्सर बालकनी या लिविंग रूम में रखा पौधा बच्चों की बॉल, खिलौने या दौड़-भाग का शिकार हो जाता है. टहनी लटक जाती है, पत्तियां फट जाती हैं. दिखने में हालत खराब लगती है, पर जड़ें सही हों तो उम्मीद पूरी रहती है.
1. साफ कट लगाना है पहला इलाज
टूटी हुई टहनी को वैसे ही लटकने देना गलती है. इससे इंफेक्शन और सड़न शुरू हो सकती है. एक साफ, तेज कैंची लें और टूटे हिस्से को नोड के थोड़ा ऊपर से काट दें. जहां से पत्तियां निकलती हैं, वही जगह नई ग्रोथ की फैक्ट्री होती है. साफ कट पौधे का स्ट्रेस कम करता है.
2. इस समय ज्यादा पानी दुश्मन है
लोग सोचते हैं टूटा पौधा है, ज्यादा पानी देंगे तो ठीक होगा. उल्टा असर पड़ता है. डैमेज के बाद जड़ें कमजोर मोड में होती हैं. मिट्टी बस हल्की नम रखें. उंगली डालकर चेक करें -गीली नहीं, बस ठंडी-सी लगे. ओवरवॉटरिंग सबसे बड़ी गलती है.
सही माहौल ही असली दवा है
3. धूप से ब्रेक दें
टूटा पौधा सीधे तेज धूप में रख देंगे तो रिकवरी स्लो हो जाती है. कुछ दिन उसे हल्की, फैली हुई रोशनी दें. खिड़की के पास पर पर्दे के पीछे, या ऐसी जगह जहां उजाला हो पर धूप चुभे नहीं. ये पौधे के लिए आराम जैसा है.
4. हल्की नेचुरल खाद से मिलेगी ताकत
रिकवरी के दौरान भारी केमिकल फर्टिलाइज़र नहीं. वर्मीकम्पोस्ट की छोटी मुट्ठी, केले के छिलके का पानी या चायपत्ती धुला हुआ पानी काम कर जाता है. ज्यादा डालेंगे तो जड़ें जल सकती हैं. याद रखें -कम, लेकिन सही.
आगे से नुकसान न हो, इसका भी जुगाड़
5. प्लांट की लोकेशन बदलना स्मार्ट मूव है
अगर बच्चा बार-बार वहीं खेलता है, तो प्लांट की जगह बदल दें. हैंगिंग पॉट्स, ऊंची शेल्फ या स्टैंड मदद करते हैं. साथ ही बच्चे को प्यार से समझाएं -“ये भी जिंदा हैं.” बच्चे जल्दी समझते हैं, बस तरीका नरम होना चाहिए.
असली बात: पौधे भी रिकवर करना जानते हैं
कई गार्डनर्स बताते हैं कि प्रूनिंग के बाद पौधे ज्यादा घने हो जाते हैं. टूटना कभी-कभी नई शाखाओं की शुरुआत भी बन जाता है. इसलिए अगली बार टहनी टूटे तो घबराहट नहीं, एक्शन प्लान याद रखें.
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