मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच हालात अब और गंभीर होते नजर आ रहे हैं और ताजा संकेत बता रहे हैं कि मामला जल्द ही नए मोड़ पर पहुंच सकता है। मौजूद जानकारी के अनुसार, पेंटागन ईरान में जमीनी सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है, जिसके चलते पूरे क्षेत्र में सैनिकों की तैनाती तेज कर दी गई है।
बता दें कि हजारों अमेरिकी सैनिक और मरीन पहले ही रणनीतिक जगहों पर पहुंच चुके हैं, जिससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि हालात बिगड़ने पर तेजी से कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, गौरतलब है कि यह किसी बड़े पैमाने के हमले की बजाय सीमित और सटीक मिशनों की तैयारी मानी जा रही है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, इन योजनाओं का फोकस ऐसे ठिकानों पर है जो ईरान की सैन्य ताकत को कमजोर कर सकते हैं, जैसे मिसाइल सिस्टम, एयर डिफेंस और समुद्री ठिकाने। खासतौर पर फारस की खाड़ी में स्थित खार्ग द्वीप को लेकर भी चर्चा तेज है, जो ईरान के तेल निर्यात का अहम केंद्र माना जाता है।
गौरतलब है कि हॉर्मुज स्टेट के आसपास भी संभावित कार्रवाई की योजना बनाई जा रही है, क्योंकि यह रास्ता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ सकता है।
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका के पास कुछ बड़े विकल्प भी मौजूद हैं, जिनमें सीमित हमलों के अलावा व्यापक सैन्य अभियान की योजना भी शामिल है। इसमें संवेदनशील ठिकानों पर बड़े पैमाने पर बमबारी और जरूरत पड़ने पर अंदरूनी इलाकों तक पहुंचकर कार्रवाई करने जैसे विकल्प शामिल बताए जा रहे हैं।
इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप के रुख को लेकर भी स्थिति साफ नहीं है। एक ओर उन्होंने सार्वजनिक रूप से सैन्य तैनाती से इनकार किया है, वहीं दूसरी ओर व्हाइट हाउस की ओर से सख्त संकेत दिए जा रहे हैं कि जरूरत पड़ने पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
गौरतलब है कि ईरान ने भी साफ चेतावनी दी है कि अगर उसकी जमीन पर हमला हुआ तो वह बिना किसी सीमा के जवाब देगा। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि जमीनी कार्रवाई की स्थिति में संघर्ष और ज्यादा फैल सकता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, अमेरिकी सेना की तैनाती इस तरह की गई है कि हालात के हिसाब से कार्रवाई को बढ़ाया या घटाया जा सके। हालांकि, जानकार यह भी मानते हैं कि किसी भी जमीनी मिशन में जोखिम काफी ज्यादा होगा, क्योंकि ईरान की सैन्य ताकत और इलाके की जटिल स्थिति बड़ी चुनौती बन सकती है।
कुल मिलाकर, फिलहाल यह सारी तैयारियां योजना के स्तर पर हैं, लेकिन जिस तरह से सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं, उससे यह साफ है कि आने वाले हफ्तों में यह संघर्ष निर्णायक मोड़ ले सकता है और इसका असर पूरे क्षेत्र के साथ वैश्विक स्तर पर भी देखने को मिल सकता है।
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