केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की मानें तो देशभर में 14 साल से कम उम्र वाले सिर्फ 45 हजार 296 बच्चे ही ऐसे हैं, जो भिक्षावृत्ति में लिप्त पाए गए। उसमें भी उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 10 हजार बच्चे भीख मांगते पाए गए, जबकि दूसरे नंबर पर राजस्थान है, जहां इन बच्चों की संख्या सात हजार से अधिक है। यह जानकारी 2011 की जनगणना के आधार पर दी गई है। राज्य सभा में एक अतारांकित सवाल के जवाब में यह जानकारी दी गई है। राज्यमंत्री बीएल वर्मा ने बताया कि आंकड़े भारत के महारजिस्ट्रार की वेबसाइट की सूचना पर आधारित है। ऐसे बच्चों के पुनर्वास की योजना 23 अक्टूबर, 2023 में शुरू की गई थी और तब से अब तक 2653 बच्चों का पुनर्वास किया गया है। इनमें 1507 बच्चों को उनके माता-पिता अथवा परिवारों से मिलवाया गया। वहीं, 305 बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों से जोड़ा गया। 206 बच्चों को बाल कल्याण समिति को सौंपा गया है। साथ ही 625 बच्चों को स्कूलों में नामांकन की सुविधा प्रदान की गई है। सरकार ने कहा कि विभाग पहले से ही भिक्षावृत्ति के कार्य में लिप्त व्यक्तियों के व्यापक पुनर्वास के लिए योजना चला रहा है। जिसमें बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ऐसे में इस समय नए कानून अथवा योजना चलाने की आवश्यकता नहीं है। दो केंद्रशासित प्रदेशों में एक भी भिखारी नहीं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि केंद्र शासित प्रदेश दादरा-नगर हवेली और अंडमान निकोबार द्वीप समूह में एक भी बच्चा भिक्षावृत्ति में लिप्त नहीं पाया गया। वहीं, लक्ष्यद्वीप और सिक्किम में एक-एक, मिजोरम में छह, दमन और दीव में आठ और पुदुचेरी में नौ बच्चे ऐसे कार्यों में लिप्त पाए गए।
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