पश्चिम एशिया का संकट अब और गहराता नजर आ रहा है और हालात तेजी से बड़े टकराव की तरफ बढ़ते दिख रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में ईरान ने इजरायल पर फिर से मिसाइल हमले किए हैं, वहीं अमेरिका की तरफ से भी सख्त रुख जारी है। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि आने वाले दो से तीन हफ्तों में ईरान पर बेहद कड़े हमले किए जाएंगे, जिससे तनाव और बढ़ गया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई जारी रहेगी, तब तक वह जवाबी हमले करता रहेगा। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि देश इस युद्ध, बातचीत और युद्धविराम के चक्र को स्वीकार नहीं करेगा और हर हमले का जवाब देगा।
इसी बीच इजरायल ने दावा किया है कि पिछले चौबीस घंटों में उसने हिज्बुल्लाह के कई ठिकानों को निशाना बनाया और करीब चालीस लड़ाकों को मार गिराया है। गौरतलब है कि इजरायली सेना ने हवाई, समुद्री और जमीनी तीनों मोर्चों पर कार्रवाई तेज कर दी है, जबकि दक्षिणी लेबनान में जमीनी अभियान भी जारी है।
ईरान की सेना ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका जमीनी हमला करता है तो उसके लिए यह बेहद भारी पड़ेगा। सेना प्रमुख ने कहा कि कोई भी दुश्मन सैनिक जिंदा वापस नहीं जा पाएगा, जो इस बात का संकेत है कि संघर्ष और बढ़ सकता है।
गौरतलब है कि हालात इतने तनावपूर्ण हो चुके हैं कि इराक में अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने की सलाह दी है। वहीं इजरायल ने कुछ घंटों के भीतर कई बार ईरानी मिसाइल हमलों को इंटरसेप्ट करने की जानकारी दी है।
मौजूद जानकारी के अनुसार खाड़ी क्षेत्र में भी असर दिख रहा है। अबू धाबी के पास एक मिसाइल को रोका गया, जिससे मामूली नुकसान हुआ। वहीं हिज्बुल्लाह ने भी उत्तरी इजरायल पर ड्रोन और रॉकेट हमले किए हैं, जिससे संघर्ष का दायरा और फैल गया है।
बता दें कि इस पूरे घटनाक्रम का असर वैश्विक स्तर पर भी दिखने लगा है। तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ रही है, खासकर होरमुज जलडमरूमध्य के कारण, जो दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है। हालांकि ईरान ने फिलीपींस को सुरक्षित मार्ग देने का आश्वासन दिया है, जिससे कुछ राहत की उम्मीद बनी है।
इस बीच रूस और चीन जैसे देशों ने भी स्थिति पर चिंता जताई है। चीन ने तत्काल युद्धविराम की अपील की है, जबकि रूस ने जरूरत पड़ने पर समाधान में मदद की बात कही है।
भारत के नजरिए से भी यह स्थिति अहम है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि देश में ईंधन या गैस की कोई कमी नहीं है और सरकार पूरी तरह तैयार है। साथ ही भारतीय नौसेना तेल टैंकरों को सुरक्षित रास्ता दिलाने में लगी हुई है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो पश्चिम एशिया में यह टकराव अब कई देशों को सीधे या परोक्ष रूप से प्रभावित कर रहा है और अगर हालात जल्दी नहीं संभले तो यह एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा दोनों पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।
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