देश की बड़ी तकनीकी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के नतीजों के साथ एक बड़ा संकेत दिया है कि अब कारोबार में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। कंपनी ने बताया कि उसकी सालाना आधार पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता से होने वाली आय बढ़कर लगभग 2.3 अरब डॉलर तक पहुंच गई है, जो पिछले तिमाही के मुकाबले काफी ज्यादा है।
बता दें कि इससे पहले पिछली तिमाही में यह आंकड़ा करीब 1.8 अरब डॉलर था, जिससे साफ है कि कंपनी के समाधान अपनाने की रफ्तार तेज हुई है। मौजूद जानकारी के अनुसार, कंपनी अब तक करीब 5,500 से ज्यादा कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर चुकी है, जो इस क्षेत्र में उसकी पकड़ को दिखाता है।
कंपनी की मुख्य संचालन अधिकारी आरती सुब्रमणियन ने कहा कि वित्त वर्ष 2026 उद्यम स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अपनाने के लिहाज से अहम रहा है। उन्होंने बताया कि नई सेवाओं, डिजिटल इंजीनियरिंग और क्लाउड आधुनिकीकरण में लगातार अच्छे समझौते मिल रहे हैं, जिससे कारोबार को मजबूती मिली है।
गौरतलब है कि कंपनी ने अपनी रणनीति में भी बड़ा बदलाव किया है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को केंद्र में रखते हुए डेटा केंद्र के क्षेत्र में निवेश बढ़ाया है। इसके तहत उसकी सहयोगी इकाई हाइपरवॉल्ट के जरिए बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है। कंपनी ने ओपनएआई सहित कई वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी भी की है, ताकि नई तकनीकों को तेजी से लागू किया जा सके।
मौजूद जानकारी के अनुसार, भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े ढांचे के निर्माण की योजना भी बनाई गई है, जिसकी शुरुआती क्षमता 100 मेगावाट रखी गई है और इसे आगे बढ़ाकर बड़े स्तर तक ले जाने का लक्ष्य है। इससे भारत को वैश्विक तकनीकी केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी मदद मिल सकती है।
अगर वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो कंपनी का चौथी तिमाही का मुनाफा बढ़कर करीब 13,718 करोड़ रुपये रहा, जो पिछली तिमाही की तुलना में लगभग 29 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं, परिचालन से होने वाली आय भी बढ़कर 70,698 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। कंपनी का परिचालन मार्जिन करीब 25.3 प्रतिशत दर्ज किया गया है।
साथ ही, कंपनी के निदेशक मंडल ने प्रति शेयर 31 रुपये के आखिरी डिविडेंड का प्रस्ताव भी रखा है, जिसे शेयरधारकों की मंजूरी के बाद लागू किया जाएगा। पूरे साल में कंपनी ने डिविडेंड के रूप में निवेशकों को करीब 39,571 करोड़ रुपये का भुगतान किया है।
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