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गर्मियों में पसीना आना कॉमन है। लेकिन क्या आपने कभी ऐसा महसूस किया है कि तापमान सामान्य है, फिर भी पसीना आ रहा है। पसीने से अजीब सी स्मेल आ रही है। अगर हां, तो ये कॉमन नहीं है। इसका मतलब ये हो सकता है कि हमारा शरीर किसी हेल्थ कंडीशन की ओर इशारा कर रहा है।
इंसान के स्वस्थ रहने के लिए पसीना आना जरूरी है, लेकिन कई बार यह सेहत से जुड़े कई अहम संकेत भी देता है। ‘साइंस डेली’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, पसीना सालों पहले ही कुछ हेल्थ कंडीशंस के संकेत देने लगता है। स्वेटिंग पैटर्न (पसीने का पैटर्न) से इसका पता लगा सकते हैं।
इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज समझेंगे कि पसीना क्यों आता है। साथ ही जानेंगे कि-
- इसका हेल्दी पैरामीटर क्या है?
- इसकी स्मेल किस बात का संकेत है?
सवाल- पसीना क्यों आता है? यह शरीर के लिए क्यों जरूरी है?
जवाब- पसीना शरीर का नेचुरल कूलिंग सिस्टम है। जब बॉडी का तापमान बढ़ता है, तो यह पसीने के जरिए खुद को ठंडा करती है।
- जब पसीना वाष्पित होता है तो शरीर का तापमान कम होता है। ये शरीर से अतिरिक्त गर्मी को कम करता है, जिससे ओवरहीटिंग नहीं होती।
- एक्सरसाइज, गर्म मौसम, स्ट्रेस या हाॅर्मोनल बदलाव में पसीना ज्यादा आता है, क्योंकि इससे मेटाबॉलिज्म और बॉडी हीट बढ़ती है।
- अगर पसीने का पैटर्न सामान्य है तो इसका मतलब है कि हार्ट, नर्वस सिस्टम और टेम्परेचर कंट्रोलिंग सिस्टम स्मूदली काम कर रहा है।

सवाल- क्या पसीना आने का भी कोई हेल्दी पैरामीटर होता है? क्या ये हेल्थ का मार्कर हो सकता है?
जवाब- पसीने की मात्रा हर व्यक्ति में अलग होती है। यह फिटनेस लेवल, जेनेटिक्स और मौसम से प्रभावित होता है।
- एक्सरसाइज के समय पसीना आना अच्छी कार्डियोवस्कुलर एडाप्टेशन का संकेत हो सकता है।
- कार्डियोवस्कुलर एडाॅप्टेशन का मतलब है, हार्ट और ब्लड वेसल्स शरीर की जरूरतों के अनुसार खुद को एडजस्ट कर रही हैं।
- बिल्कुल पसीना न आना या बहुत ज्यादा आना (हाइपरहाइड्रोसिस) कभी-कभी नर्व, हॉर्मोन या स्किन प्रॉब्लम्स से जुड़ा हो सकता है।
- पसीने की गंध या रंग में बदलाव इन्फेक्शन या डिहाइड्रेशन का संकेत दे सकता है।
- हेल्दी पैरामीटर यह है कि शरीर की जरूरत के अनुसार तापमान संतुलन बना रहे, थकान या चक्कर जैसे लक्षण न हों।
सवाल- क्या ज्यादा या कम पसीना आना किसी हेल्थ प्रॉब्लम का संकेत हो सकता है?
जवाब- हां, ज्यादा पसीने का मतलब है कि बॉडी की टेम्परेचर कंट्रोल करने की क्षमता प्रभावित हुई है। अगर बिना मेहनत किए ही पसीना आ रहा है तो हॉर्मोन्स या नर्वस सिस्टम से जुड़ी समस्या हो सकती है। वहीं बहुत कम पसीना डिहाइड्रेशन जैसी किसी समस्या का संकेत हो सकता है।
ज्यादा या कम पसीना आने के सभी संभावित कारण ग्राफिक में देखिए-

सवाल- स्वेटिंग पैटर्न (कब, कितना और कहां) से सेहत के बारे में क्या पता चलता है?
जवाब- पसीने का पैटर्न और उसकी स्मेल कई हेल्थ रिस्क का संकेत दे सकती है। अलग-अलग संकेत क्या बताते हैं, ग्राफिक में देखिए-

सवाल- पसीने का पैटर्न कब किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है?
जवाब- पसीना आना सामान्य है और स्वस्थ रहने के लिए जरूरी भी है। हालांकि, कुछ मामलों में यह किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है-
- अचानक ठंडा-चिपचिपा पसीना- लो BP या हार्ट स्ट्रेस संकेत हो सकता है।
- बहुत तेज बदबू वाला पसीना- इन्फेक्शन या मेटाबॉलिक बदलाव का संकेत हो सकता है।
- मेहनत के बिना लगातार पसीना- यह हाइपरहाइड्रोसिस का संकेत हो सकता है।
- चक्कर, कमजोरी के साथ पसीना- शरीर में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का संकेत हो सकता है।
- तेज गर्मी में भी पसीना न होना- कूलिंग फेलियर, अनहाइड्रोसिस का संकेत हो सकता है।
- रात में अचानक गर्मी के साथ पसीना- क्रॉनिक इन्फेक्शन या हॉर्मोन इश्यू का संकेत हो सकता है।
- एकदम नया स्वेटिंग पैटर्न- ऐसे में मेडिकल चेकअप जरूरी है।
सवाल- क्या हाॅर्मोनल बदलाव, थायरॉइड या डायबिटीज के कारण भी स्वेटिंग पैटर्न बदल सकता है?
जवाब- हां, हॉर्मोनल बदलाव, थायरॉइड या डायबिटीज तीनों का स्वेटिंग पैटर्न से सीधा कनेक्शन है-
- हॉर्मोन शरीर के तापमान और मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करते हैं।
- थायरॉइड ज्यादा एक्टिव होने पर ज्यादा ब़डी हीट बनती है। इससे पसीना बढ़ सकता है।
- लो थायरॉइड में पसीना कम और स्किन ड्राई लग सकती है।
- बीमारी जैसे हाइपर-थायरॉइडिज्म में बार-बार पसीना आ सकता है।
- ब्लड शुगर लो होने पर अचानक पसीना और कंपकंपी हो सकती है। यह कंडीशन डायबिटीज में भी देखी जाती है।
- प्यूबर्टी या मेनोपॉज में हॉट फ्लैशेज (अचानक गर्मी लगना) के साथ स्वेटिंग हो सकती है।
सवाल- क्या स्ट्रेस और एंग्जाइटी के कारण भी पसीने का पैटर्न बदल सकता है? इसके क्या संकेत होते हैं?
जवाब- हां, स्ट्रेस के कारण शरीर की हॉर्मोनल एक्टिविटीज बदलती हैं और इससे पसीने का पैटर्न भी बदल जाता है-
- स्ट्रेस में सिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम (शरीर का फाइट या फ्लाइट मोड में जाना) एक्टिव होकर पसीना बढ़ाता है।
- हथेलियों, तलवों और अंडरआर्म में अचानक पसीना आना कॉमन है।
- सामान्य तापमान में भी पसीना आना एंग्जाइटी ट्रिगर का संकेत हो सकता है।
- स्ट्रेस बढ़ने पर तेज हार्ट रेट के साथ पसीना हो सकता है।
- पब्लिक स्पीकिंग या डर की स्थिति में पसीना बढ़ना सामान्य प्रतिक्रिया है।
- लगातार स्ट्रेस से स्वेटिंग पैटर्न अनियमित हो सकता है।
सवाल- हेल्दी स्वेटिंग और बॉडी टेम्परेचर बैलेंस रखने के लिए लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करने चाहिए?
जवाब- इसके लिए लाइफस्टाइल में कुछ छोटे-छोटे बदलाव करने चाहिए। इसे ग्रफिक में देखिए-

सवाल- पसीने की स्मेल कम करने और स्किन को हेल्दी रखने के लिए क्या करना चाहिए?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- रोज नहाते समय अंडरआर्म, पैर और स्किन फोल्ड्स (शरीर के जॉइंट्स के आसपास की स्किन) अच्छी तरह साफ करें।
- एंटीबैक्टीरियल और स्किन-फ्रेंडली साबुन इस्तेमाल करें।
- नहाने के बाद थोड़ी देर बॉडी में हवा लगने दें।
- ढीले और साफ कपड़े पहनें।
- पसीना होने पर रोज कपड़े बदलें।
- डाइट में फाइबर, हरी सब्जियां और प्रोबायोटिक फूड शामिल करें।
- बहुत मीट, प्रोसेस्ड और जंक-फूड कम खाएं।
- नींबू पानी या हर्बल ड्रिंक लें। इससे बॉडी ओडर कंपाउंड्स नही बनाती है।
सवाल- किस तरह का स्वेटिंग पैटर्न दिखने पर डॉक्टर के पास जाना चाहिए?
जवाब- इन सभी कंडीसंस में डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है-
- अगर बिना वजह बहुत ज्यादा या अचानक पसीना हाे।
- अगर पसीने के साथ सीने में दबाव, घबराहट या सांस फूले।
- अगर बार-बार रात में भीग जाने जैसा पसीना आए।
- अगर गर्मी या एक्सरसाइज में भी पसीना न आए, शरीर बहुत गर्म लगे।
- अगर सिर्फ एक साइड या एक हिस्से में असामान्य स्वेटिंग दिखे।
- अगर पसीने के साथ चक्कर, कमजोरी या बेहोशी महसूस हो।
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