संगीत जगत के दिग्गज डॉ. इलैयाराजा के कॉपीराइट विवाद से जुड़ा एक अहम मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है, जहां आज एक निर्णायक आदेश सुनाया गया। सर्वोच्च न्यायालय ने सोनी एंटरटेनमेंट इंडिया द्वारा दायर ट्रांसफर याचिका को मानते हुए इलैयाराजा के साथ चल रहे कॉपीराइट मुकदमे को मद्रास उच्च न्यायालय से बॉम्बे उच्च न्यायालय में ट्रांसफर करने का आदेश दिया है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला दो अलग‑अलग मुकदमों के बीच टकराव के रूप में उभरा है। जनवरी 2022 में सोनी म्यूजिक ने बॉम्बे हाईकोर्ट में एक सिविल मुकदमा दायर किया था, जिसमें उन्होंने इलैयाराजा को 536 संगीत रचनाओं का अवैध इस्तेमाल बंद करने के लिए स्थायी रोक की मांग की थी। सोनी का दावा है कि उसने ओरिएंटल रिकॉर्ड्स और इको रिकॉर्डिंग से अधिकार खरीद लिए हैं और इसलिए उसके पास इन गीतों के कॉपीराइट हैं। इसके विपरीत, सितम्बर 2025 में इलैयाराजा ने मद्रास उच्च न्यायालय में एक समान मुकदमा दायर किया, जिसमें सोनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई और उनके अधिकारों को चुनौती दी गई। इस अधिकार विवाद का उद्देश्य यह तय करना है कि वास्तव में कौन इन रचनाओं का कानूनी मालिक है, संगीतकार खुद या कोई तीसरी कंपनी। सोनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंहवी ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि मद्रास में दायर इलैयाराजा का मामला बॉम्बे में पहले दायर मुक़दमे से अलग नहीं है और इससे दोनों न्यायालय अलग‑अलग फैसले दे सकते हैं, जिससे जटिलता और कानूनी विरोधाभास पैदा हो सकता है। इलैयाराजा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने बॉम्बे हाईकोर्ट की न्यायालयिक अधिकारिता पर सवाल उठाते हुए तर्क किया कि मद्रास में मामला होना चाहिए क्योंकि इससे दोनों पक्षों के दावे न्यायसंगत तरीके से सुने जा सकते हैं। बेंच के न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति विनोद के चंद्रन ने अंततः सोनी की याचिका को मंजूर करते हुए कहा कि इस तरह के दोनों मामलों को एक ही न्यायालय में सुनवाई के लिए ट्रांसफर करना जरूरी है ताकि किसी भी तरह के विरोधी निर्णय से बचा जा सके। इस आदेश के तहत अब विवाद बॉम्बे हाईकोर्ट में जारी रहेगा। यह फैसला संगीतकार और म्यूजिक इंडस्ट्री के बीच कॉपीराइट के अधिकारों से जुड़ी बढ़ती कानूनी लड़ाइयों में एक महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। इलैयाराजा ने एक दशक से अधिक समय से अपने संगीत के अधिकारों की रक्षा के लिए कई मुकदमे लड़े हैं, और सुप्रीम कोर्ट का यह कदम अब आगे की कानूनी प्रक्रिया को एक ही दिशा में सामान्य करने का प्रयास है।
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