बांग्लादेश में नई सरकार को चुनने के लिए वोटिंग के बाद अब मतों की गिनती शुरू हो चुकी है. इस बीच पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने चुनावों को रद्द करने की मांग की है. मोहम्मद यूनुस को फासीवादी बताते हुए अवामी लीग की मुखिया ने उनके इस्तीफे की मांग भी रखी है.
शेख हसीना ने बयान जारी कर अपनी छह मांगें रखी हैं. इनमें चुनावों को अंसैवाधानिक और अवैध बताते हुए रद्द करने, मोहम्मद यूनुस का इस्तीफा, झूठे मामलों को वापस लेने, सभी राजनीतिक कैदियों के साथ-साथ शिक्षकों, बुद्धिजीवियों और पेशेवरों की रिहाई, अवामी लीग की गतिविधियों पर लगे प्रतिबंध को हटाने और निष्पक्ष चुनाव कराए जाने की मांग की गई है.
यह चुनाव मोहम्मद यूनुस का किया हुआ ढ़ोंग हैः हसीना
हसीना ने अपने बयान में कहा कि बांग्लादेश में विभिन्न स्तरों पर आम जनता, विशेषकर महिलाओं और अल्पसंख्यक समुदायों ने इस चुनाव का बहिष्कार कर दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि मोहम्मद यूनुस ने अवैध और असंवैधानिक तरीके से सत्ता पर कब्जा किया और उनके द्वारा आयोजित यह चुनाव योजनाबद्ध तरीके से किया गया एक ढ़ोंग है.
उन्होंने कहा कि यह चुनाव जनता के वोट करने के अधिकारों, लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की भावना की अनदेखी करते हुए आयोजित किया गया और यह प्रक्रिया अवामी लीग की भागीदारी और वास्तविक मतदाताओं के बिना ही पूरी की गई.
चुनावी प्रक्रिया में व्यापक अनियमितताओं के लगाए आरोप
वहीं, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री ने चुनाव प्रक्रिया में व्यापक अनियमितताओं का भी आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि बुधवार (11 फरवरी, 2026) की शाम से ही पोलिंग सेंटरों पर कब्जा, गोलीबारी, वोट खरीदने के लिए पैसे का इस्तेमाल, बैलेट पेपर पर पहले से मुहर लगाना और रिजल्ट शीट्स पर एजेंटों के साइन जबरन करवाने जैसी घटनाएं शुरू हो गई थीं.
उन्होंने यह भी कहा कि गुरुवार (12 फरवरी, 2026) की सुबह से ही देशभर के ज्यादातर मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की उपस्थिति बेहद कम रही, जबकि राजधानी ढाका और अन्य स्थानों पर कई पोलिंग सेंटर्स पूरी तरह खाली दिखाई दिए. शेख हसीना ने आरोप लगाया कि इस तरह की परिस्थितियों में कराया गया चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
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