प्राइम डेटाबेस के मुताबिक जनवरी 2026 के आखिर तक म्यूचुअल फंड्स के पास आईटी कंपनियों में कुल 3,95,404 करोड़ रुपये का निवेश था. यह दिसंबर के 3,97,310 करोड़ रुपये से कम है. यानी एक महीने में ही बड़ी रकम निकाली गई.
कई दिग्गज शेयर अपने 52 हफ्तों के उच्च स्तर से काफी नीचे आ चुके हैं. Oracle Financial Services Software (OFSS), Wipro, TCS और Coforge करीब 30% या उससे ज्यादा गिर चुके हैं. Infosys लगभग 27% और HCL Tech करीब 18% नीचे फिसल चुके हैं. यह गिरावट दिखाती है कि निवेशकों का भरोसा पहले जैसा मजबूत नहीं रहा.
सेलिंग में आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट कंपनी सबसे आगे रही. इसने जनवरी में Infosys में लगभग 1,953 करोड़ रुपये की बिकवाली की. साथ ही TCS में 783 करोड़ और HCL Tech में 623 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. कुल मिलाकर TCS में सभी म्यूचुअल फंड्स की नेट सेलिंग 302.53 करोड़ रुपये, Tech Mahindra में 966.71 करोड़ और HCL Tech में 817.35 करोड़ रुपये रही.
सिर्फ एक कंपनी में भरोसा कायम
दिलचस्प बात यह रही कि 10 प्रमुख आईटी शेयरों में सिर्फ Wipro में म्यूचुअल फंड्स ने खरीदारी की. आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड और क्वांट म्यूचुअल फंड ने यहां अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई.
Wipro आईटी सर्विसेज, कंसल्टिंग, बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग और क्लाउड सॉल्यूशंस में सक्रिय है. कंपनी AI ट्रांसफॉर्मेशन और डिजिटल सर्विसेज पर भी तेजी से काम कर रही है. शायद यही वजह है कि जब बाकी कंपनियों से फंड मैनेजर्स दूरी बना रहे थे, तब Wipro में उन्हें भविष्य की संभावना दिखी.
AI का असर: खतरा या अवसर?
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की रुचि मुखीजा के अनुसार, आईटी सर्विसेज की टेक वैल्यू चेन में स्थिति कमजोर हो रही है. उनका कहना है कि अब पूंजी AI इंफ्रास्ट्रक्चर और सॉफ्टवेयर की ओर जा रही है, जिससे नई टेक्नोलॉजी पर होने वाले खर्च में सर्विसेज कंपनियों की हिस्सेदारी घट रही है. जेनरेटिव और एजेंटिक AI कोडिंग, टेस्टिंग, सपोर्ट और मेंटेनेंस जैसे कामों में 20-40% तक प्रोडक्टिविटी बढ़ा सकता है.
ब्रोकरेज का अनुमान है कि 2023 से 2026 के बीच ग्लोबल टेक स्पेंड में आईटी सर्विसेज की हिस्सेदारी 8 प्रतिशत पॉइंट्स तक घट सकती है. OpenAI और Anthropic जैसे AI लीडर्स तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. इनकी सालाना रेवेन्यू रन-रेट क्रमशः 20 बिलियन और 14 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है.
हालांकि तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है. ISG के अनुसार, 65% आईटी लीडर्स का मानना है कि मौजूदा डेटा की जटिलता AI की रफ्तार को धीमा कर रही है. ऐसे में आईटी कंपनियां AI-रेडी डेटा आर्किटेक्चर और सिस्टम मॉडर्नाइजेशन के जरिए नई भूमिका निभा सकती हैं.
मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि मौजूदा वैल्यूएशंस पहले से ही कमजोर हालात को दर्शा रहे हैं. वहीं जेपी मॉर्गन का कहना है कि AI पूरी तरह एंटरप्राइज-ग्रेड सॉफ्टवेयर की जगह नहीं ले सकता. आईटी सर्विसेज कंपनियां “टेक वर्ल्ड के प्लंबर” बनी रहेंगी, यानी सिस्टम को चलाने और संभालने में उनकी जरूरत बनी रहेगी.
फिलहाल आईटी सेक्टर अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है. लेकिन लंबे समय में लेगेसी कोड मॉडर्नाइजेशन, ERP ट्रांसफॉर्मेशन और AI-रेडी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में नए मौके बन सकते हैं. निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे भावनाओं में नहीं, बल्कि वैल्यूएशन और फंडामेंटल्स को ध्यान में रखकर फैसला लें.
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