शुक्रवार का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए किसी झटके से कम नहीं था. FPI ने भारतीय बाजार से ₹7,395.41 करोड़ के शेयर बेच डाले. यह बिकवाली इसलिए भी हैरान करने वाली थी क्योंकि फरवरी के पहले 13 दिनों में इन्हीं निवेशकों ने करीब ₹19,675 करोड़ रुपये भारतीय शेयर बाजार में डाले थे. अगर हम साल 2026 के ओवरऑल आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि विदेशी निवेशक अब तक शुद्ध बिकवाल रहे हैं और ₹16,287 करोड़ रुपये मूल्य की भारतीय इक्विटी बेच चुके हैं.
घरेलू निवेशकों ने लगाया खूब पैसा
जब विदेशी निवेशकों ने बिकवाली का बटन दबाया, तब घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने बाजार को थामने की पुरजोर कोशिश की. डीआईआई ने शुक्रवार को ₹5,553.96 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की. दिलचस्प बात यह है कि 31 दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक, निफ्टी 50 कंपनियों में अब घरेलू संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी (24.8%) विदेशी निवेशकों (24.3%) से अधिक हो गई है.
एआई ने उड़ाए बाजार के होश
बाजार में आई इस गिरावट का सबसे बड़ा विलेन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी वैश्विक आशंकाओं को माना जा रहा है. AI के कारण बिजनेस मॉडल में संभावित बदलाव के डर से निवेशकों ने आईटी शेयरों में जमकर बिकवाली की. नतीजतन, निफ्टी आईटी इंडेक्स 10 महीने के निचले स्तर पर फिसल गया और तकनीकी रूप से ‘बेयर मार्केट’ में प्रवेश कर गया.
₹7 लाख करोड़ स्वाहा
शुक्रवार का दिन भारतीय निवेशकों के लिए भारी रहा. एक ही सत्र में निवेशकों की करीब ₹7.02 लाख करोड़ की वेल्थ साफ हो गई. बीएसई सेंसेक्स 1,000 अंकों से ज्यादा टूटकर 82,626.75 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 भी 25,500 के अहम स्तर के नीचे फिसल गया. एनएसई के सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में रहे, जिसमें निफ्टी मेटल इंडेक्स 3.3% की गिरावट के साथ सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ.
ट्रेड डील का लाभ हुआ हवा
हाल ही में हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद जो तेजी बाजार में दिखी थी, वह शुक्रवार की गिरावट के साथ लगभग गायब हो गई. हालांकि इस समझौते से निर्यात-उन्मुख (Export-oriented) सेक्टरों को फायदा होने की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल वैश्विक अनिश्चितता और आईटी सेक्टर की कमजोरी ने बाजार के सेंटिमेंट को बिगाड़ दिया है.
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