भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने दिल्ली, कोलकाता और लखनऊ के हवाई अड्डों से कुल सात विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इनमें छह नागरिक यूक्रेन के हैं और एक अमेरिका का है। इन सभी पर आरोप है कि वे म्यांमार के रास्ते भारत के उत्तर-पूर्वी हिस्से में अवैध रूप से दाखिल हुए थे। सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि ये लोग ‘पीपल्स डिफेंस फोर्स’ नामक संगठन को ट्रेनिंग दे रहे थे, जिसे म्यांमार की सैन्य सरकार ने आतंकवादी घोषित कर रखा है।
रूस का तीखा हमला
इस घटना पर रूस ने यूक्रेन की सरकार पर कड़ा तंज कसा है। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने यूक्रेन प्रशासन को ‘नव-नाजी’ बताते हुए कहा कि वे अपने नागरिकों की संदिग्ध गतिविधियों को छिपाना चाहते हैं। जखारोवा ने अपने बयान में कहा, ‘नई दिल्ली में यूक्रेनी दूतावास की प्रतिक्रिया से साफ है कि वे इस मामले को दबाना चाहते थे। यूक्रेनी विदेश मंत्रालय ने अपने नागरिकों द्वारा भारतीय कानूनों के उल्लंघन पर तो चुप्पी साध ली, लेकिन उल्टा भारतीय और रूसी समाचार एजेंसियों पर ही गलत खबरें फैलाने का आरोप लगा दिया।’
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यूक्रेन का ‘साजिश’ वाला दावा
वहीं, यूक्रेन ने इन गिरफ्तारियों को एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश करार दिया है। यूक्रेनी दूतावास ने इस बात पर चिंता जताई है कि यह पूरी कार्रवाई रूस द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर की गई है।
दूतावास की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि मीडिया रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि यह कार्रवाई रूसी पक्ष की सूचना पर हुई है। मौजूदा तथ्यों को देखते हुए हमें डर है कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित और एक गहरी साजिश का हिस्सा हो सकता है।
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