क्या यह वाकई एक नया ट्रेंड है?
देखा जाए तो भारतीय समाज में शादी हमेशा से एक सोशल इवेंट की तरह रहा है जहाँ ‘जितने ज्यादा लोग, उतनी बड़ी खुशी’ मानी जाती थी. लेकिन कोरोना के बाद यह धारणा बदल रही है. अब इसे ‘इंटेंशन वेडिंग’ कहा जा रहा है. कोरोना काल के दौरान मजबूरी में शुरू हुई ‘छोटी शादियाँ’ अब एक लग्जरी और मानसिक शांति का प्रतीक बन गई हैं. अब लोग इसे मजबूरी नहीं, बल्कि एक ‘स्टेटस और स्टाइल’ के रूप में अपना रहे हैं.
शादी को प्राइवेट रखने की 5 मुख्य वजहें-
1. ‘परफेक्ट’ दिखने के सोशल प्रेशर नहीं- जब शादी में 500 या 1000 मेहमान होते हैं, तो दूल्हा-दुल्हन का पूरा ध्यान इस बात पर होता है कि वे कैसे दिख रहे हैं और अरेंजमेंट कैसा है. सोशल मीडिया पर लाइव अपडेट्स का दबाव इसे और बढ़ा देता है. प्राइवेट शादी में कपल इस ‘परफॉर्मेंस’ से बच जाते हैं और वास्तव में अपनी खुशी को जी पाते हैं.
2. ‘वैलिडेशन’ के बजाय ‘कनेक्शन’ पर फोकस- मैरिज काउंसलर्स का कहना है कि आज के कपल्स बाहरी लोगों की ‘वाह-वाही’ (Validation) के बजाय आपसी जुड़ाव (Connection) को ज्यादा महत्व दे रहे हैं. उनका मानना है कि शादी दो लोगों का मिलन है, कोई सर्कस नहीं. प्राइवेट वेडिंग में केवल वही लोग शामिल होते हैं जो कपल के वाकई करीब होते हैं, जिससे माहौल काफी इमोशनल और सच्चा होता है.
3. ‘नो-फोन पॉलिसी’ और असली यादें- आजकल शादियों में प्रोफेशनल फोटोग्राफर से ज्यादा मेहमानों के मोबाइल कैमरे सक्रिय रहते हैं. प्राइवेट शादियों में अक्सर ‘नो-फोन पॉलिसी’ लागू की जाती है. इसका फायदा यह है कि लोग स्क्रीन में उलझने के बजाय अपनी आँखों से यादें कैद करते हैं और रस्मों का आनंद लेते हैं.
4. मानसिक सुकून और कम तनाव- बड़ी शादियों की प्लानिंग में अक्सर कपल इतना थक जाते हैं कि शादी के दिन वे खुश रहने के बजाय तनाव में दिखते हैं. प्राइवेट वेडिंग में भागदौड़ कम होती है, जिससे कपल मानसिक रूप से शांत और तरोताजा महसूस करते हैं. यह ‘डिजिटल सनसेट’ की तरह ही है, जहाँ आप बाहरी दुनिया का शोर बंद करके शांति चुनते हैं.
फाइल फोटो.
5. बजट का सही इस्तेमाल- आज की पीढ़ी दिखावे पर लाखों रुपये पानी की तरह बहाने के बजाय उस पैसे को अपने भविष्य, घर या एक शानदार हनीमून पर खर्च करना बेहतर समझती है. कम मेहमानों का मतलब है, बेहतर क्वालिटी का खाना, अच्छी मेहमाननवाजी और कम फिजूलखर्ची.
प्यार निभाने के लिए है, दिखाने के लिए नहीं!
शादी को प्राइवेट रखना किसी की अपनी पसंद हो सकती है, लेकिन यह ट्रेंड हमें एक जरूरी बात सिखाता है, खुशी की गहराई लोगों की गिनती में नहीं, बल्कि पलों की सादगी में होती है. लोग अब समझ रहे हैं कि प्राइवेसी में जो सुकून है, वह शोर-शराबे और सोशल मीडिया के ‘लाइक्स’ में नहीं मिल सकता.
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