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Which Is The Oldest Sweet Of Varanasi In Hindi : वाराणसी अपनी गलियों, घाटों और मोक्ष के लिए उतना ही मशहूर है जितना अपनी मिठाइयों के लिए. जब बनारस की सबसे पुरानी और असली मिठाइयों की बात आती है, तो इस खास मिठाई का नाम दिमाग में आता है. इस इलाके की सबसे पुरानी मिठाइयों में से एक माना जाता है.
Which Is The Oldest Sweet Of Varanasi In Hindi : वाराणसी (बनारस) अपनी गलियों, घाटों और मोक्ष के लिए जितना प्रसिद्ध है, उतना ही अपनी मिठाइयों के लिए भी जाना जाता है. जब बात बनारस की सबसे पुरानी और प्रामाणिक मिठाई की आती है, तो नाम आता है मलाई पूरी का. लेकिन ऐतिहासिक और पारंपरिक तौर पर मलाई पूरी को यहां की सबसे प्राचीन मिठाइयों में गिना जाता है.

भारत की आध्यात्मिक राजधानी वाराणसी, मलाई पूरी की अनोखी डिश का घर है, जो सदियों से वाराणसी की खाने की परंपरा का एक अहम हिस्सा रही है. माना जाता है कि इसकी शुरुआत मुगल काल से हुई थी, जब यह शाही परिवार और अमीर लोगों की पसंदीदा डिश थी. मलाई पूरी नाम से ही पुरानी यादें और सम्मान की भावना आती है, क्योंकि ‘मलाई’ का मतलब दूध की पत्तियां होता है, और पूरी इस डिश की नाजुकता को दिखाती है.

मलाई पूरी बनाना भैंस के दूध से क्रीम की पहली परत निकालने से शुरू होता है. इन परतों को हटाकर अलग रख दिया जाता है. यह प्रोसेस लकड़ी से जलने वाले मिट्टी के चूल्हे पर किया जाता है, जिससे इसे हल्का स्मोकी स्वाद मिलता है.
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फिर परतदार क्रीम को चीनी और सूखे मेवों के साथ नाइट्रोजनेट किया जाता है, जिससे स्वादों का एक अच्छा बैलेंस बनता है. पुराने भारत में, जब लोगों को यह नहीं पता था कि आटे, चीनी और तेल से मिठाइयां बनाई जा सकती हैं, तो ऐसी मिठाइयां शाही परिवारों को परोसी जाती थीं.

मलाई पूरी सिर्फ़ एक मिठाई नहीं है, यह वाराणसी की आत्मा को दिखाती है. मलाई पूरी वाराणसी की सड़कों पर पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों में परोसी जाती है. यह त्योहारों और खास मौकों पर एक पॉपुलर चॉइस है.

वाराणसी (बनारस) की सबसे पुरानी और सबसे मशहूर पारंपरिक मिठाइयों में से एक है मलइयो, जो सिर्फ़ सर्दियों (दिसंबर-फ़रवरी) में मिलती है. यह दूध की मलाई और ओस की हल्की महक से बनी एक हल्की और फूली हुई मिठाई है, जिसे फिर मथकर गोले बनाए जाते हैं और केसर, पिस्ता और मेवों के साथ परोसा जाता है. इसकी कीमत लगभग ₹600 प्रति किलोग्राम है.

बनारस की एक और ऐतिहासिक मिठाई है तिरंगा बर्फी. इसे आज़ादी की लड़ाई के दौरान श्री राम भंडार ने बनाया था. इस केसरिया, सफ़ेद और हरे रंग की बर्फी का इस्तेमाल देशभक्तों को सीक्रेट मैसेज भेजने और क्रांतिकारियों के बीच एकता बढ़ाने के लिए किया जाता था.

अगर आप वाराणसी घूमने जा रहे हैं, तो मलाई पूरी ज़रूर ट्राई करें!
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