झांसी की सड़कों पर चलते ही आपको एक खास खुशबू महसूस होगी – गरमा-गरम आलू बंडा की. उबले आलू में मसाले, हल्की मिर्च और नमक मिलाकर गोल-गोल गोले बनाए जाते हैं, फिर इन्हें बेसन के घोल में डुबोकर सुनहरी तली में तल लिया जाता है. जैसे ही यह तेल से बाहर आता है, इसकी महक दूर तक फैल जाती है. बच्चों से लेकर बुज़ुर्ग तक हर कोई इसे चाव से खाता है. सस्ती, पेट भरने वाली और बेहद स्वादिष्ट, झांसी का आलू बंडा हर मौसम में लोगों के दिल और स्वाद दोनों को भा जाता है.
झांसी में अगर आप सुबह और शाम के समय किसी भी बाजार या चौराहे पर चले जाएं तो आपको एक चीज़ ज़रूर दिखेगी गरमा-गरम आलू बंडा.यहां के लोगों को स्नैक्स में आलू बंडा बहुत पसंद है. बच्चे हों, बड़े हों या बुज़ुर्ग हर कोई इसे बड़े चाव से खाते है.

आलू बंडा दिखने में बहुत साधारण होता है, लेकिन इसका स्वाद दिल खुश कर देता है. उबले हुए आलू में नमक, मिर्च और कुछ मसाले मिलाकर गोल गोल गोले बनाए जाते हैं. फिर इन्हें बेसन के घोल में डुबोकर गरम तेल में तला जाता है. जैसे ही यह तेल से बाहर आता है इसकी खुशबू दूर तक फैल जाती है.

गरम गरम आलू बंडे को देखकर राह चलते लोग भी रुक जाते हैं. झांसी के लोगों को आलू बंडा इसलिए भी पसंद है क्योंकि यह सस्ता और पेट भरने वाला होता है. कम पैसों में अच्छा नाश्ता मिल जाता है.
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स्कूल के बच्चे छुट्टी के बाद, ऑफिस से लौटते लोग और बाजार में खरीदारी करने आए परिवार सबके हाथ में कागज़ की प्लेट में आलू बंडा दिख जाता है.

कई लोग इसे हरी चटनी या मीठी चटनी के साथ खाना पसंद करते हैं. कुछ लोग इसे ब्रेड में रखकर भी खाते हैं.बारिश के दिनों में तो आलू बंडा खाने का मज़ा और बढ़ जाता है.गरम बंडा और हल्की ठंडी हवा, बस फिर क्या चाहिए.

झांसी के ऐतिहासिक किले को देखने आने वाले सैलानी झांसी के इस खास आलू बंडा को खूब खाते हैं. और अपने परिजनों को आलू बंडा खिलाने के लिए पैक भी करवा कर ले जाते हैं.
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