Kathal Pakori Recipe: कटहल को शाकाहारियों का नॉनवेज कहा जाता है. इससे सब्जी, अचार जैसे बहुत से आइटम बनते हैं पर इसकी पकौड़ियों की बात ही अलग होती है. शाम को चाय और चटनी के साथ कटहल की पकौड़ी मिल जाए तो बिना बात ही घर में पार्टी हो जाती है. जानते हैं इसकी आसान रेसिपी.
कैसे बनते हैं कटहल के पकौड़े
सबसे पहले कटहल को काटने का काम थोड़ा धैर्य मांगता है. चाकू और हाथों में सरसों का तेल लगा लिया जाता है ताकि उसका चिपचिपा दूध हाथ में न चिपके. फिर कटहल को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर अच्छी तरह पानी से धोया जाता है. इसके बाद एक बड़े भगौने या कुकर में हल्का नमक और एक चुटकी हल्दी डालकर कटहल को उबाल लिया जाता है. उबलने से उसका कच्चापन और चिपचिपापन दोनों खत्म हो जाते हैं और टुकड़े नरम हो जाते हैं. ठंडा होने पर हल्का-सा मसल दिया जाता है ताकि उसमें मसाला आसानी से घुल-मिल जाए.
अब है दाल की बारी
अब रसोई में असली खुशबू शुरू होती है. एक बड़े परात में बेसन और थोड़ा-सा भीगा-पिसा चना दाल मिलाया जाता है, जिससे पकोड़े अंदर से और भी स्वादिष्ट और हल्के कुरकुरे बनते हैं. इसमें नमक, हल्दी, लाल मिर्च, अजवाइन, धनिया पाउडर, बारीक कटी हरी मिर्च, अदरक-लहसुन का पेस्ट और थोड़ा-सा गरम मसाला डाला जाता है. कई घरों में स्वाद बढ़ाने के लिए एक चुटकी आमचूर या चाट मसाला भी मिला दिया जाता है. फिर थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर गाढ़ा घोल तैयार किया जाता है और उबले कटहल के टुकड़ों को इसमें अच्छी तरह मिला दिया जाता है, ताकि हर टुकड़ा मसालेदार परत से लिपट जाए.
आंच बहुत जरूरी
इधर चूल्हे या गैस पर कढ़ाई में सरसों का तेल गरम होने लगता है. जैसे ही तेल से हल्का धुआं उठता है, कटहल के घोल लगे टुकड़ों को धीरे-धीरे तेल में छोड़ा जाता है. कढ़ाई में पड़ते ही छन-छन की आवाज और मसालों की खुशबू पूरे घर में फैल जाती है. मध्यम आंच पर पलट-पलट कर इन्हें सुनहरा भूरा होने तक तला जाता है. बाहर से कुरकुरे और अंदर से नरम पकोड़े तैयार होते ही उन्हें कागज या छलनी पर निकाल लिया जाता है.
शाम ढलते-ढलते आंगन में चारपाई लग जाती है, चाय बनती है और साथ में धनिया-पुदीना की ताजी चटनी पीसी जाती है. गरमागरम कटहल के पकोड़ों पर हल्का चाट मसाला छिड़ककर जैसे ही परोसा जाता है, सबका इंतजार खत्म हो जाता है. कोई इसे चाय के साथ खाता है, तो कोई सॉस के साथ. इसका स्वाद इतना भरपूर होता है कि कई लोग इसे मजाक में “शाकाहारी मटन” भी कह देते हैं. इस तरह एक साधारण-सा कटहल, झारखंड के घरों में शाम को छोटे-से त्योहार जैसा माहौल बना देता है.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें
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