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सिंह ने कहा कि पश्चिम बंगाल वीरों और क्रांतिकारियों की भूमि है, और उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सहित बंगाली परिवर्तनकर्ताओं के योगदान को रेखांकित किया। रक्षा मंत्री ने कहा कि बंगाल की मिट्टी में त्याग और आत्मसम्मान समाहित है। मैं आपका उत्साह देख रहा हूं, और मैं कह सकता हूं कि ‘परिवर्तन’ की घोषणा बंगाल की धरती से हो। मैं कहना चाहता हूं कि परिवर्तन का समय आ गया है। अब छुकना मत। मैं इसे रैली नहीं मानता, मैं इसे बंगाल में परिवर्तन की ‘घोषणा’ मानता हूं।
उन्होंने आगे कहा कि यह वीरों की भूमि है। यह क्रांतिकारियों की भूमि है। यह नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भूमि है। उन्होंने कहा था, ‘मुझे रक्त दो, और मैं तुम्हें स्वतंत्रता दूंगा।’ बंगाल की भूमि साधारण नहीं है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म यहीं हुआ था। उन्होंने कहा था कि इस देश में ‘दो विधान’, ‘दो निशान’ और ‘दो प्रधान’ नहीं चलेंगे। उस समय उन्होंने जो नारा लगाया था, वह मात्र नारा नहीं, बल्कि एक प्रतिज्ञा थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने उस प्रतिज्ञा को पूरा किया। अब इस देश में ‘दो विधान’, ‘दो निशान’ और ‘दो प्रधान’ कभी नहीं होंगे। यहाँ ‘एक देश, एक विधान, एक निशान’ होगा।
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श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने एक बार जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में कहा था कि दो संविधान (विधान), दो शीर्ष प्रमुख (प्रधान) और दो ध्वज (निशान) का दोहरापन नहीं हो सकता। इससे पहले दिन में, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ‘परिवर्तन’ शब्द पश्चिम बंगाल को “घुसपैठ और भ्रष्टाचार मुक्त” बनाने और तृणमूल कांग्रेस सरकार को भाजपा सरकार से बदलने की इच्छा को दर्शाता है।
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